Friday, June 5, 2026
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जाखल रेलवे जंक्शन में अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग संगठन रेलवे कार्यालय बना असामाजिक तत्वों का अड्डा

टूटी चारदीवारी और खंडहर बने परिसर में दिन-रात नशेड़ियों का जमावड़ा, लोगों में दहशत

जाखल मंडी, 20 मई, 2026 (संजीव शर्मा) : जाखल रेलवे जंक्शन क्षेत्र में स्थित अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग संगठन का रेलवे कार्यालय इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है। वर्षों से अनदेखी का शिकार यह परिसर अब असामाजिक तत्वों, नशेड़ियों और संदिग्ध गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है, जिससे आसपास के लोगों में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो गया है।

कार्यालय परिसर की टूटी हुई चारदीवारी, जर्जर भवन, उगी हुई झाड़ियां और चारों ओर फैली गंदगी प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार दिन-रात यहां नशेड़ियों और संदिग्ध व्यक्तियों का जमावड़ा लगा रहता है। खुलेआम नशाखोरी होने से महिलाओं, बच्चों और आसपास रहने वाले परिवारों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि रेलवे सीमा की टूटी दीवार के कारण असामाजिक तत्व बिना किसी रोक-टोक के परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। देर रात यहां संदिग्ध गतिविधियां देखी जाती हैं, जिससे चोरी, झगड़े और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह परिसर अब सामाजिक संगठन के कार्यालय से अधिक नशाखोरी और अपराध का केंद्र दिखाई देने लगा है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।

इस गंभीर मामले पर Dr. Rajesh Sharma, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नशे के बढ़ते प्रभाव पर कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा— “नशा केवल एक व्यक्ति को बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे समाज, परिवार और आने वाली पीढ़ियों को अंधकार की ओर धकेल देता है। जिस स्थान पर सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक गतिविधियां होनी चाहिए थीं, वहां आज नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सरकारी भवनों की देखरेख तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से बचाना भी उसका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो यह स्थिति समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

हम रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आरपीएफ से मांग करते हैं कि तत्काल प्रभाव से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, टूटी चारदीवारी का पुनर्निर्माण कराया जाए, नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाए तथा पूरे क्षेत्र में विशेष नशामुक्ति और सफाई अभियान चलाया जाए। समाज को नशामुक्त और सुरक्षित बनाना केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

डॉ. राजेश शर्मा ने आगे कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित विभागों ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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