जाखल मंडी, 08 मई, 2026 (संजीव शर्मा) : स्थानीय बृज लाल जिंदल डीएवी पब्लिक स्कूल जाखल मंडी में आज मातृ दिवस बड़े उत्साह, हर्षोल्लास और सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन माताओं के प्रेम, त्याग, समर्पण और स्नेह को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया, ताकि माताएं अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर खुशी और उत्सव के इन विशेष पलों का आनंद ले सकें। स्वागत नृत्य और दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शानदार आगाज हुआ।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के सम्मान में नृत्य की विशेष प्रस्तुति दी। छात्रों के साथ-साथ उनकी माताओं ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। नन्हें विद्याथियों ने अपनी माताओं के साथ गाने, तुकबंदी और विभिन्न खेलों व अन्य गतिविधियों में भाग लिया। विद्यार्थियों की इस मनमोहक प्रस्तुति कि अभिभावकों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
प्राचार्य जयदेव शर्मा जी ने मातृ दिवस पर बहुत गहरी बात कही- घर ही बच्चे का पहला स्कूल होता है। “बच्चा घर से सीखता है” घर का माहौल शांत है या कलह भरा, बच्चा वही अपनाता है। दिवाली, होली कैसे मनाते हैं – मिलजुल कर या दिखावे से, बच्चे देखते हैं। साफ-सफाई, अनुशासन, बड़ों का आदर – बच्चा माँ-बाप को देखकर सीखता है। समय पर खाना, साथ बैठकर खाना, अन्न का सम्मान – ये सब घर से आता है। दूसरों से कैसे बात करते हैं, मदद करते हैं या नहीं – बच्चा कॉपी करता है। घर में गाली-गलौज है या मीठी बोली, बच्चे की ज़ुबान वही बनती है। माँ 24 घंटे बच्चे के साथ रहती है। उसका हर शब्द, हर काम बच्चे के चरित्र की नींव बनता है। इसीलिए कहा जाता है – “एक माँ 100 शिक्षकों के बराबर होती है”। डी.ए.वी. स्कूल जाखल मंडी में मातृ दिवस पर ये संदेश देकर प्राचार्य जी ने माताओं को उनकी ज़िम्मेदारी का एहसास कराया। स्कूल और घर मिलकर चलें तभी बच्चा संस्कारी बनता है। ये बात आज के समय में और भी ज़रूरी है जब बच्चे मोबाइल-टीवी से ज्यादा सीख रहे हैं। 
इसके साथ प्राचार्य ने एक बात ओर कही जो हर इंसान के दिल को छू गई । “भगवान शायद हर स्थान पर नहीं हो सकते, इसलिए भगवान ने मां को बनाया” माँ में भगवान का रूप जैसे- ममता, क्षमा, त्याग, निस्वार्थ प्रेम – ये सारे गुण भगवान के हैं और माँ में दिखते हैं भगवान दिखते नहीं, पर माँ हर सुख-दुख में बच्चे के साथ खड़ी रहती है। डी.ए.वी. स्कूल जाखल मंडी में मातृ दिवस पर ये संदेश देकर प्राचार्य जयदेव शर्मा जी ने माँ के महत्व को बहुत खूबसूरती से समझाया। डी.ए.वी. संस्थाएं भारतीय संस्कृति और मूल्यों को बच्चों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। माँ को परिवार की धुरी बताते हुए कहा कि मां ही बच्चों की पहली गुरु होती है जो बच्चों को जीवनपर्यंत सही शिक्षा देती है।
स्कूल के बच्चों ने मातृ दिवस के मौके पर नाटक व गीतों के माध्यम से मां के त्याग एवं उनकी ममता को नमन किया। बच्चों ने बड़े ही मनमोहक अंदाज में अपनी माताओं के बारे में बताया। अपनी माताओं के बारे में विभिन्न प्रकार की कविताएं प्रस्तुत कर विद्यार्थियों ने मनोरंजन किया। इतना ही नहीं बच्चों ने पेंटिग एवं पोस्टर बनाकर मां के प्रति प्रेम को दर्शाया। स्कूल में बच्चों ने सामूहिक रूप से ‘तू कितनी अच्छी है, तू कितनी सुंदर है’ गीत सुनाकर सब को भावुक कर दिया। बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भाव विभोर कर दिया। 
माताओं के लिए खेल प्रतियोगिता से मातृ दिवस का उत्साह दोगुना हो गया। इससे माताएं भी खुलकर कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। इस अवसर पर स्कूल में बच्चों की माताओं के लिए रोचक खेल करवाए गए जिससे पूरा माहौल खुशनुमा हो गया। मोमबत्ती बुझाओ में नीतू, दुपट्टा बांधना में गजल, म्यूजिकल ग्लास में पल्लवी और रिबन-चना बांधना में भतेरी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। खेलों के ज़रिए माताओं को सम्मान दिया गया और स्कूल-परिवार का रिश्ता मजबूत हुआ। विजेता माताओं को पुरस्कृत किया गया। डी.ए.वी. स्कूल जाखल मंडी शिक्षा के साथ संस्कार देने में भी हमेशा अग्रणी रहा है।
“माता निर्माता भवति”
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Jaidev Sharma
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