गोथेनबर्ग (स्वीडन), 17 मई 2026: नरेंद्र मोदी पांच देशों की अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में रविवार शाम स्वीडन पहुंचे। नीदरलैंड दौरे के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी का विमान स्वीडिश हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, तब स्वीडन के अत्याधुनिक ग्रिपेन लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया। गोथेनबर्ग एयरपोर्ट पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने स्वयं पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह दो दिवसीय यात्रा भारत और स्वीडन के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, हरित परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई तकनीक, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेन, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडिश प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को भी संबोधित करेंगे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहेंगी। यह मंच यूरोप के बड़े उद्योग समूहों और वैश्विक निवेशकों का प्रमुख व्यापारिक मंच माना जाता है।
स्वीडन पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड का सफल दौरा पूरा किया। वहां उनके और डच प्रधानमंत्री के बीच रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, जल प्रबंधन, सेमीकंडक्टर, नवाचार और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार नेटवर्क पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि नीदरलैंड यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड ने जल संसाधन, रक्षा, स्थिरता, मोबिलिटी और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और उनके डच समकक्ष ने प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक डैम का भी दौरा किया, जहां जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस यात्रा को गुजरात के महत्वाकांक्षी कल्पसर प्रोजेक्ट के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि, बंदरगाह, डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ के साथ भी बैठक की और उन्हें भारत में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का निमंत्रण दिया।