तीसरी भाषा का नहीं होगा बोर्ड एग्जाम
नई दिल्ली, 17 मई 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने नई भाषा नीति को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि छात्रों को राहत देते हुए बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड परीक्षा में कोई पेपर नहीं होगा।
CBSE द्वारा 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार यह नियम बोर्ड से संबद्ध सभी स्कूलों में लागू होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना है।
बोर्ड ने तीन भाषाओं के फॉर्मूले को R1, R2 और R3 नाम दिया है। नए नियम के तहत छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। यदि छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहते हैं तो उसे केवल तीसरी भाषा (R3) या अतिरिक्त चौथे विषय के रूप में लिया जा सकेगा।
CBSE ने कहा है कि तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसके अंक या ग्रेड अंतिम मार्कशीट में शामिल होंगे, लेकिन इसके लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इससे छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव कम करने का प्रयास किया गया है।
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू किया गया है। पहले यह व्यवस्था 2030-31 तक लागू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे तुरंत कक्षा 9 और 10 में लागू किया जा रहा है।
बोर्ड ने यह भी जानकारी दी कि नई R3 पुस्तकों के उपलब्ध होने तक कक्षा 6 की भाषा पुस्तकें अस्थायी रूप से उपयोग में लाई जाएंगी। साथ ही स्कूलों को स्थानीय और क्षेत्रीय साहित्य जैसे कविताएं, कहानियां और गद्य सामग्री भी पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
CBSE के अनुसार 19 अनुसूचित भाषाओं की पुस्तकें 1 जुलाई 2026 से पहले स्कूलों को उपलब्ध करवा दी जाएंगी। वहीं RPWD Act 2016 के तहत कुछ विशेष श्रेणी के छात्रों को दूसरी या तीसरी भाषा से छूट भी दी जाएगी।
स्कूलों को 30 जून 2026 तक OASIS पोर्टल पर अपनी भाषा संबंधी जानकारी अपडेट करनी होगी।






