Saturday, June 6, 2026
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ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, 44वें दिन युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में

तेहरान/वॉशिंगटन, 14 अप्रैल 2026: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध आज 44वें दिन में प्रवेश कर गया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। हालात दिन-ब-दिन और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।

अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान CENTCOM ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे (ET) से ईरान की सभी बंदरगाहों पर समुद्री यातायात की सख्त नाकाबंदी लागू कर दी। इसके तहत ईरान की ओर जाने या वहां से आने वाले हर जहाज की जांच की जा रही है। हालांकि बाद में CENTCOM ने स्पष्ट किया कि उनका निशाना केवल ईरानी बंदरगाहों से जुड़ा ट्रैफिक है, न कि पूरा समुद्री मार्ग।

इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ‘US crude’ 8.7 प्रतिशत बढ़कर 104.8 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 102 डॉलर के पार चला गया है। युद्ध से पहले तेल की कीमत करीब 67 डॉलर थी, जो 44 दिनों में लगभग 56 प्रतिशत बढ़ चुकी है।

एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी जा रही है। जापान का Nikkei, दक्षिण कोरिया का Kospi और हांगकांग का Hang Seng दबाव में हैं। स्थिति को देखते हुए जर्मनी ने ईंधन पर टैक्स में 17 यूरो सेंट प्रति लीटर की कटौती की है, क्योंकि यूरोपीय संघ में गैस की कीमतें 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

दूसरी ओर, ईरान ने इस नाकाबंदी को ‘डाकूआई’ करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि यदि उनकी बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि ‘हुरमुज की चाबी’ उनके हाथ में है।

वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में करीब 230 तेल टैंकर फंसे हुए हैं और रोजाना गुजरने वाले 130 जहाजों के मुकाबले अब केवल 17 जहाज ही स्ट्रेट पार कर पा रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के ‘सही तरीके से चलने’ का दावा किया है, जबकि नाकाबंदी के फैसले ने हालात को और उलझा दिया है। यह सीजफायर 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिससे अगले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

हालांकि वॉशिंगटन में इजरायल और लेबनान के राजनयिकों की बैठक ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि 22 अप्रैल के बाद हालात सुधरेंगे या युद्ध और भड़क सकता है।

 

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