नई दिल्ली, 24 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) के दायरे से बाहर हो जाएगा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता और वह SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाले लाभ या कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जो व्यक्ति ईसाई धर्म अपना कर उसका सक्रिय रूप से पालन और प्रचार करता है, वह अपनी पूर्व जाति के आधार पर आरक्षण या अन्य सुविधाओं का हकदार नहीं रह जाता।
मामले में अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछले दस वर्षों से ईसाई धर्म से जुड़ा हुआ था और एक पादरी के रूप में चर्च में सेवाएं दे रहा था। ऐसे में अदालत ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति संवैधानिक रूप से अनुसूचित जाति की श्रेणी में बने रहने का अधिकार खो देता है।
यह फैसला धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।






