Friday, June 5, 2026
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पीएम मोदी ने कुरुक्षेत्र में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस में भाग लिया, विशेष सिक्का और डाक टिकट जारी किया

कुरुक्षेत्र (हरियाणा), 25 नवंबर 2025:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सिखों के नवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने गुरुजी के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सैंड पेंटिंग को देखा।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे, जो गुरु तेग बहादुर जी की शहादत और आध्यात्मिक विरासत को समर्पित हैं।

‘पंचजन्य’ का उद्घाटन

अयोध्या में अपने धार्मिक कार्यक्रमों के बाद पीएम मोदी कुरुक्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान कृष्ण के पवित्र शंख के सम्मान में निर्मित ‘पंचजन्य’ का उद्घाटन किया। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने महाभारत अनुभव केंद्र का दौरा किया, जहां महाकाव्य महाभारत के प्रमुख प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

गुरु तेग बहादुर जी: हिंद की चादर

गुरु तेग बहादुर जी (1621–1675) सिखों के नौवें गुरु, महान आध्यात्मिक दार्शनिक, कवि और मानवता की रक्षा के प्रतीक—”हिंद की चादर”—के रूप में सम्मानित हैं।

उनकी 115 बानियां गुरु ग्रंथ साहिब का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो ईश्वर, विरक्ति, मृत्यु, दुःख तथा निस्वार्थ जीवन के संदेश देती हैं।

अयोध्या में ध्वजारोहण के बाद पहुंचे कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र पहुंचने से पहले पीएम मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के 191 फीट ऊंचे शिखर पर भगवा धर्म ध्वज फहराया।

यह ध्वज ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष—तीन पवित्र चिन्हों को धारण करता है। कोविदार, ऋषि कश्यप द्वारा निर्मित मंदार और पारिजात का प्राचीन संकर्षण (हाइब्रिड) बताया जाता है। सूर्य भगवान राम की सूर्यवंशी वंश परंपरा और ॐ सनातन धर्म के मूल आध्यात्मिक स्वर का प्रतीक है।

“भारत और विश्व राममय” — प्रधानमंत्री

ध्वजारोहण समारोह में संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा:

*”आज पूरा भारत और विश्व राममय है। हर राम भक्त के हृदय में असाधारण संतोष और कृतज्ञता है। सदियों के घाव भर रहे हैं, सदियों का दर्द शांत हो रहा है। आज वह संकल्प पूर्ण हो रहा है जिसकी अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही।”

प्रधानमंत्री के इस दौरे ने धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले दोनों स्थलों—अयोध्या और कुरुक्षेत्र—में अध्यात्म और परंपरा के प्रति गहरा संदेश दिया।

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