राजपुरा, 19 जून 2026 : निदेशक आयुर्वेद पंजाब डॉ. रमन खन्ना के मार्गदर्शन तथा जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी (डीएयूओ) पटियाला डॉ. मोहन कौशल के सहयोग से इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” के अंतर्गत मनाए जा रहे 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वृक्षासन के महत्व को लेकर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।
आयुष्मान आरोग्य केंद्र, राजपुरा की आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. पूजा अरोड़ा द्वारा वृक्षासन का प्रदर्शन किया गया।
वृक्षासन अथवा ट्री पोज़ योग की सबसे प्रभावशाली और व्यापक रूप से अभ्यास की जाने वाली मुद्राओं में से एक है, जो स्थिरता, विकास और सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। वृक्ष की मजबूती और अडिगता से प्रेरित यह आसन साधकों को शारीरिक संतुलन, मानसिक एकाग्रता और आंतरिक शांति विकसित करने में सहायता करता है।
वृक्षासन का नियमित अभ्यास पैरों, टखनों और शरीर की कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही यह शरीर की मुद्रा (पोश्चर) और समन्वय में सुधार करता है। यह एकाग्रता बढ़ाने, आत्मविश्वास को मजबूत करने तथा सचेतनता और नियंत्रित श्वास के माध्यम से भावनात्मक स्थिरता को प्रोत्साहित करने में भी सहायक है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार वृक्षासन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है और इसे स्वस्थ जीवनशैली का नियमित हिस्सा बनाया जा सकता है। यह आसन विशेष रूप से तनाव कम करने, न्यूरोमस्कुलर समन्वय में सुधार लाने तथा धैर्य और लचीलेपन को विकसित करने में लाभकारी माना जाता है।
समग्र स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच वृक्षासन शारीरिक फिटनेस और मानसिक सुख-शांति प्राप्त करने का एक सरल लेकिन प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरा है। साधकों को विशेषज्ञों के उचित मार्गदर्शन में इस आसन का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसमें एक पैर पर संतुलन बनाए रखते हुए किसी निश्चित बिंदु पर ध्यान केंद्रित करना और श्वास को नियंत्रित रखना शामिल है।
दुनियाभर में योग की बढ़ती लोकप्रियता स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने तथा समग्र कल्याण सुनिश्चित करने में वृक्षासन जैसी पारंपरिक योग विधियों के महत्व को रेखांकित करती है।






