चंडीगढ़, 11 जून 2026 (छत्तरपाल सिंह) : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिख समाज और प्रदेशवासियों से किया गया एक महत्वपूर्ण वादा पूरा करते हुए राज्य के स्कूलों की कक्षा 8वीं के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं तथा बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन और योगदान को शामिल कर दिया है। अब स्कूली विद्यार्थी सिख गुरुओं की शिक्षाओं, त्याग, बलिदान और आदर्शों के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्षपूर्ण जीवन से भी परिचित हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा में आयोजित गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के अवसर पर घोषणा की थी कि आने वाली पीढ़ियों को सिख इतिहास, गुरुओं के आदर्शों और उनके महान बलिदानों से परिचित कराने के लिए इन्हें स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा। सरकार ने अब इस घोषणा को अमल में लाते हुए संबंधित विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी सिख गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा, करुणा, भाईचारे और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उन्होंने समाज को जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर मानव कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे समाज में सद्भाव, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का मार्ग दिखाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरु और बाबा बंदा सिंह बहादुर केवल किसी एक समुदाय की धरोहर नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रेरणा से अन्याय, अत्याचार और शोषण के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और महान विभूतियों के आदर्शों से जोड़ने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम में शामिल किए गए ये अध्याय विद्यार्थियों में देशभक्ति, सेवा भावना, सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का सशक्त साधन मानती है। इसी सोच के तहत ऐसे महापुरुषों के जीवन और शिक्षाओं को पाठ्यक्रम में स्थान दिया जा रहा है, जिन्होंने देश और समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किए हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें संवेदनशील, जागरूक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनने की प्रेरणा देगी।







