टोहाना 21 अप्रैल 2026 ( संजीव सिंगला) : शहर में लगभग ग्रामीण क्षेत्र से लोकल बच्चों को स्कूल ले आने व छोड़ने के लिए हर स्कूल ट्रांसपोर्ट स्कूल वैनों का इस्तेमाल करता है। इन स्कूल वैनों वाले सरकार के सभी नॉर्म निर्देश लगभग दर किनार करते हुए शहर व ग्रामीण स्कूलों के संचालक स्कूलों में आने वाले बच्चों में घर पर इंतजार कर रहे बच्चों के अभिभावकों से अन्याय कर रहे हैं कई बच्चों के अभिभावकों ने संवाददाता को यह भी बताया कि स्कूल संचालकों द्वारा मुंह मांगी ट्रांसपोर्ट फीस लेने के बावजूद भी बच्चों की जिंदगी इन खस्ता हालात की वैनों में हर वक्त बच्चे खतरों से खेलते हैं हर वक्त जब तक बच्चे घर तक नहीं पहुंचते उनकी जान मुट्ठी में बनी रहती है स्कूल वाहनों को यातायात पुलिस द्वारा जांच की कार्यवाही कर फिटनेस सर्टिफिकेट देना चाहिए ज्यादातर स्कूल वैनों में न तो मेडिकल फास्टड कीट होती है और न ही चालक वर्दी में होते हैं। यहां तक की कई स्कूल वालों की स्कूल वैनों पर स्कूल नाम व मोबाइल नंबर तक (अंकित) लिखा हुआ नहीं होता छोटे बच्चों को ले जाने में छोड़ने वाली स्कूल वनों में अटेंडेंस तक भी उपलब्ध नहीं है। लोगों के दिलों में एक सवाल हर वक्त उठता दिखाई देता है कि क्या यह यातायात पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिए नहीं बनी है यह सिर्फ बाइक ( बुलेट) के चालान काटने के लिए बनी है हरियाणा शिक्षा मंत्री को चाहिए कि यातायात पुलिस को यह आदेश जारी करें कि हर स्कूल की हर महीने वाहनों की फिटनेस की जांच कर एक फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करें जिससे अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित न रहेऔर सरकार का धन्यवाद करे।






