Sunday, June 7, 2026
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शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को लूटते हुए देख शिक्षा विभाग बना मूक दर्शक

टोहाना 21 अप्रैल 2026 ( संजीव सिंगला) :  शहर व ग्रामीण क्षेत्र में सरकार की गलत नीतियों और फैसलों के कारण हीं बच्चों का भविष्य अंधकार में हो गया है बढ़ती आबादी व शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धाओं के कारण सरकार को एक तरफ जहां शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाना चाहिए था। वही सरकार सरकारी स्कूलों की संख्या प्रतिदिन कम करती जा रही है जिससे निजी प्राइवेट स्कूलों को अप्रत्यक्ष इसका फायदा मिल रहा है। सरकारी स्कूलों की संख्या कम होने की कारण अभिभावक मजबूर होकर अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में दिलाते हैं यह प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं और अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं ।यह स्कूल एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज, ट्यूशन फीस, महंगी किताबें , स्टेशनरी, ड्रेस, स्मार्ट क्लास और अन्य फंक्शन की सुविधाओं के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। कई निजी स्कूलों में गैर मान्यता प्राप्त स्कूल जो प्ले स्कूल कम बड़े स्कूल ज़्यादा हैं जो शहर के शहरी इलाकों में मकान और बंद गलियों दुकानों चौबारों पर चल रहे हैं उनके पास नया तो फायर एन ओ सी और अन्य सुरक्षा प्रमाण पत्र भी नहीं है । इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी अत्यधिक है जो कि पशुओं की तरह क्लासों में ठोस ठोस कर भरे हुए होते हैं। प्रशासन से मांग है कि इन गैर मान्यता प्राप्त स्कूलकी सूची सार्वजनिक करें ताकि नए एडमिशन सत्र से पहले अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन सरकार द्वारा प्राप्त मान्यता वाले स्कूलों में करवा सकें और सरकारी स्कूलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर स्कूलों में बच्चों की संख्या भी बढ़ाएं ।आए दिन अखबारों व सोशल मीडिया की सुर्खियां बने शिक्षा विभाग के अधिकारी हर रोज गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर ठोस कार्रवाई के आदेश देते-देखे जा सकते हैं गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों द्वारा  अभिभावकों को लूटते हुए देख कर शिक्षा विभाग के अधिकारी मुक दर्शक बने हुए प्रतीत होते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी हर रोज गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर ठोस कार्यवाही के आदेश देते देखे जा सकते हैं पर धरातल पर कोई भी अधिकारी इन निजी स्कूलों की तरफ झांकता हुआ भी प्रतीत नहीं होता लोगों का यह भी कहना है कि इन निजी स्कूलों में सरकारी विभागों के उच्च अधिकारियों के ही ज्यादातर बच्चे पढ़ते हैं और एक मोटी रकम उनकी शिक्षा पर खर्च करते हैं सरकारी स्कूलों में तो सिर्फ सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं के लिए ही आम आदमी के व्यक्ति के बच्चे ही शिक्षा प्राप्त करते हैं। सरकार यदि चाहे तो सभी सरकारी स्कूल उस दिन शिखर पर होंगे जिस दिन सरकारी विभागों के कर्मचारी व सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बच्चे इन सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करेंगे। सरकार यदि सरकारी स्कूलों को कामयाब करना चाहती है तो इस पर ध्यान देना पड़ेगा नहीं तो हश्र बीएसएनल जैसा होगा।

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