चैत्र नवरात्रि के पावन उत्सव के चौथे दिन, यानी आज 22 मार्च 2026 को, श्रद्धालु जगत जननी के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्मांडा की आराधना कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर केवल अंधकार था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ‘ब्रह्मांड’ की रचना की थी। इसी कारण इन्हें सृष्टि की आदि-शक्ति और आदि-स्वरूपा कहा जाता है।
तेज और आरोग्य की देवी
माँ कूष्मांडा सूर्यमंडल के भीतर के लोक में निवास करती हैं, इसलिए उनकी कांति और प्रभा सूर्य के समान ही देदीप्यमान है। अष्टभुजाधारी होने के कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि माँ की भक्ति से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि साधक के सभी रोगों और शोकों का नाश होता है।
पूजन विधि और प्रिय भोग
आज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के पश्चात लाल वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। माँ को कुम्हड़ा (पेठा) अति प्रिय है, जिसकी बलि या भोग अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
- शुभ रंग: आज के दिन नारंगी (Orange) रंग के वस्त्र धारण करना शुभ है, जो ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है।
- विशेष भोग: माँ को मालपुए का भोग लगाना चाहिए। इससे बुद्धि और निर्णय लेने की शक्ति का विकास होता है।
मंत्र साधना
माँ की कृपा प्राप्ति के लिए आज इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है:
“या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ कूष्मांडा सौरमंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो, उन्हें आज के दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे यश, बल और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
विशेष टिप: माँ कूष्मांडा की पूजा में आज ‘हरी इलायची’ और ‘सौंफ’ अर्पित करना न भूलें, यह आपके परिवार में खुशहाली लाता है।






