संघर्ष से सफलता और मीडिया जगत के शिखर तक का सफर
लाइफस्टाइल/पटियाला: 26 अप्रैल 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): विश्व प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक महेश भट्ट के लोकप्रिय अन-स्क्रिप्टेड शो ‘पहचान’ (Pehchan) में इस बार ‘पंजाब रत्न’ और चढ़दीकला ग्रुप के चेयरमैन स. जगजीत सिंह दर्दी अपनी जीवन यात्रा के अनसुने पन्ने साझा करेंगे। इस इंटरव्यू के दौरान स. दर्दी के एक साधारण व्यक्ति से मीडिया जगत की दिग्गज शख्सियत बनने तक के सफर को बखूबी चित्रित किया गया है।
संघर्षमयी जीवन की मिसाल
जगजीत सिंह दर्दी ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे एक लंबी जद्दोजहद है। एक समय ऐसा था जब वह अपनी रोजी-रोटी के लिए कुल्हाड़ी से लकड़ियां फाड़ते थे और उन्हें बोरियों में भरकर रिक्शे के जरिए गलियों में बेचते थे। उन्होंने कहा कि इतनी कड़ी मेहनत के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा ‘चढ़दीकला’ (उच्च मनोबल) के जज्बे में रहे।
15 साल की उम्र में जेल और तशद्दुद (प्रताड़ना)
शो के दौरान स. दर्दी ने अपने जीवन के एक बेहद कठिन दौर का जिक्र किया। 1965 में, महज 15 साल की उम्र में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के विरुद्ध रोस प्रदर्शन करने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि पुलिस रिमांड के दौरान अमृतसर के इंटेरोगेशन सेंटर में उन्हें भारी शारीरिक प्रताड़ना दी गई, पर उन्होंने न तो कोई झूठा बयान दिया और न ही माफी मांगी।
मीडिया जगत में प्रवेश और राष्ट्रीय भूमिका
जेल से बाहर आने और कानूनी लड़ाई जीतने के बाद उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। उन्हें निडरता अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता से विरासत में मिली थी। स. दर्दी ने अपनी उपलब्धियों के बारे में बताया कि:
-
वह पिछले 36 वर्षों से इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं।
-
वह तीन बार प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रह चुके हैं।
-
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कई अंतरराष्ट्रीय दौरों पर मीडिया प्रतिनिधि के रूप में शिरकत की और बिल क्लिंटन जैसे विश्व नेताओं का इंटरव्यू भी किया।
शो के दौरान यह उभर कर सामने आया कि कैसे स. जगजीत सिंह दर्दी ने अनेक दुख-तकलीफों और चुनौतियों का सामना करते हुए एक संघर्षमयी जीवन व्यतीत किया। उनकी मेहनत और दृढ़ इरादे की बदौलत ही आज चढ़दीकला ग्रुप (अखबार और न्यूज चैनल) मीडिया क्षेत्र में एक बड़ा नाम है। इसके अलावा उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान (स्कूल और कॉलेज) और एक प्रख्यात लेखक के रूप में उनकी रचनात्मकता के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य बिंदु:
-
मीडिया मुगल: चढ़दीकला टाइम टीवी और रोजाना चढ़दीकला अखबार के जरिए पंजाबी पत्रकारिता को नई बुलंदियों पर पहुँचाया।
-
शिक्षाविद: कई नामी शैक्षणिक संस्थानों के जरिए नई पीढ़ी को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका।
-
साहित्यिक योगदान: एक गंभीर लेखक के रूप में सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर हमेशा आवाज बुलंद की।






