राज्यसभा में सांसद सुभाष बराला ने शून्यकाल के दौरान उठाया मुद्दा
फ़तेहाबाद, 06 फरवरी, 2026 (संजीव शर्मा): राज्यसभा सांसद श्री सुभाष बराला ने शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान राज्यसभा में बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर चर्चा करते हुए देश में तेजी से बढ़ रहे अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के उपभोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे विकसित भारत की आधारशिला से जुड़ा हुआ है।
श्री बराला ने सदन में कहा कि भारतीय सभ्यता में भोजन को कभी केवल उपभोग की वस्तु नहीं माना गया। हमारे लिए अन्न संस्कार था, विज्ञान था और संतुलन था। मां के हाथ का सादा भोजन, मौसमी अनाज, दालें, छाछ, दही और मोटे अनाज वह आधार रहे हैं, जिन्होंने पीढिय़ों तक भारत को स्वस्थ, श्रमशील और आत्मनिर्भर बनाए रखा।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज स्थिति तेजी से बदल रही है। बच्चे पैकेट वाले, अत्यधिक मीठे और नमकीन खाद्य पदार्थों के आदी हो रहे हैं। ये खाद्य पदार्थ पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को आवश्यक पोषण नहीं दे पाते। इसका परिणाम यह है कि बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अन्य गैर-संक्रामक बीमारियाँ खतरनाक गति से बढ़ रही हैं। देश में हर चार में से एक वयस्क प्री-डायबिटिक या डायबिटिक है और बच्चों में मोटापा चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुका है।
राज्यसभा सांसद ने बताया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड में पोषण अत्यंत कम, जबकि चीनी, नमक और अस्वस्थ वसा अत्यधिक मात्रा में होती है। इन्हें इस प्रकार तैयार और प्रचारित किया जाता है कि बच्चों में इनकी लत लग जाए। आक्रामक विज्ञापनों और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। नतीजतन, हमारे बच्चे उपभोक्ता नहीं, बल्कि बाजार बनते जा रहे हैं।
श्री बराला ने सदन को अवगत कराया कि अमेरिकन वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह सामने आया है कि कई पैकेज्ड फूड्स में ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं, जो सिगरेट की तरह लत पैदा करते हैं। इस शोध के आधार पर प्रकाशित एक महत्वपूर्ण पेपर में एडिक्शन साइंस, पब्लिक हेल्थ हिस्ट्री और पॉलिसी से जुड़े साक्ष्यों को जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि अनेक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को जानबूझकर उसी इंडस्ट्री प्लेबुक का उपयोग कर बनाया गया है, जिससे आधुनिक सिगरेट तैयार की गई थीं। यह शोध मार्केटिंग रेगुलेशन के लिए एक मजबूत आधार प्रस्तुत करता है, जैसा कि इंडिया के इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भी रेखांकित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि देश के भविष्य, कार्यबल की गुणवत्ता और आर्थिक मजबूती से जुड़ा प्रश्न है। यदि बच्चे अस्वस्थ होंगे, तो वे भविष्य में एक मजबूत कार्यबल नहीं बन पाएंगे और देश पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ कई गुना बढ़ जाएगा।
राज्यसभा सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि बच्चों को लक्षित अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड विज्ञापनों पर सख्त रोक लगाई जाए, पैकेट पर स्पष्ट और प्रभावी चेतावनी लेबलिंग अनिवार्य की जाए, स्कूलों और आंगनवाडिय़ों में पारंपरिक भोजन एवं मोटे अनाज को बढ़ावा दिया जाए, ईट राइट इंडिया’ अभियान और मिलेट्स मिशन को और अधिक सशक्त किया जाए।
उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार वहां बच्चों के खाद्य विज्ञापनों और जंक फूड पर कड़े नियम बनाए गए हैं, उसी तरह भारत में भी समय रहते सख्त और प्रभावी नियम लागू किए जाने चाहिए। श्री सुभाष बराला ने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव हैं। यदि हमें सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनाना है, तो बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
फोटो: फतेहाबाद। शून्यकाल के दौरान राज्यसभा में बोलते हुए राज्यसभा सांसद सुभाष बराला।






