वॉशिंगटन (अमेरिका), 29 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। 28 जनवरी को दिए गए बयान में ट्रंप ने साफ कहा कि यदि बातचीत से कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की एक बड़ी नौसैनिक ताकत, जिसे उन्होंने “मैसिव आर्माडा” बताया, ईरान की ओर बढ़ रही है। इस बेड़े की अगुवाई विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन कर रहा है। ट्रंप ने ईरान से तुरंत बातचीत की मेज पर लौटने और ऐसा समझौता करने की अपील की, जिससे परमाणु हथियारों के विकास पर पूरी तरह रोक लग सके।
ट्रंप ने लिखा, “उम्मीद है कि ईरान जल्दी बातचीत के लिए आगे आए और एक निष्पक्ष व न्यायसंगत समझौता करे—कोई परमाणु हथियार नहीं।” उन्होंने चेतावनी दी कि “समय तेजी से खत्म हो रहा है” और यदि ईरान ने बात नहीं मानी तो अगला हमला पहले से कहीं ज्यादा गंभीर होगा।
अपने बयान में ट्रंप ने जून 2025 में हुए अमेरिकी सैन्य अभियान का भी जिक्र किया, जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। वॉशिंगटन का दावा है कि उस कार्रवाई से ईरान की परमाणु क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा था। ट्रंप ने दोहराया कि यदि कूटनीति विफल रही तो सैन्य दबाव एक विकल्प बना रहेगा।
वहीं, ईरान ने अमेरिका की धमकियों के साए में किसी भी बातचीत को खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, “धमकियों के माहौल में कोई बातचीत संभव नहीं है।” उन्होंने अमेरिकी दबाव नीति को नाकाम और उलटा असर डालने वाला बताया। हालांकि ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह “परस्पर लाभकारी, निष्पक्ष और न्यायसंगत परमाणु समझौते” के लिए तैयार है, बशर्ते बातचीत बिना दबाव के हो।
ईरानी नेतृत्व ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। कुछ अधिकारियों ने किसी भी हमले को बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की शुरुआत बताया है, जिसमें अमेरिकी हितों और उसके सहयोगियों को निशाना बनाया जा सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप की यह सख्त भाषा हाल के महीनों में अमेरिकी रुख में आए बदलाव को दर्शाती है। पहले जहां ईरान में मानवाधिकारों के मुद्दे पर जोर दिया जा रहा था, अब व्हाइट हाउस की प्राथमिकता में परमाणु कार्यक्रम सबसे ऊपर आ गया है।
फिलहाल दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। अमेरिका ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने वाला समझौता चाहता है, जबकि ईरान शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों के अपने अधिकार पर जोर देते हुए धमकियों से मुक्त बातचीत की मांग कर रहा है।






