नई दिल्ली: रूस ने भारत के साथ अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने की पुष्टि की है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि रूस भारत की तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के लिए तेल, गैस और कोयले का स्थिर और निर्बाध सप्लायर बना रहेगा।
पुतिन ने बताया कि सहयोग पारंपरिक ऊर्जा से आगे बढ़कर परमाणु ऊर्जा तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि रूस भारत में सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र बना रहा है और दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों, फ्लोटिंग न्यूक्लियर प्लांट्स और चिकित्सा–कृषि में परमाणु तकनीक के उपयोग की संभावनाएं भी तलाशेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश INSTC कॉरिडोर के ज़रिए रूस और बेलारूस को हिंद महासागर से जोड़ने के लिए नए व्यापारिक मार्ग विकसित कर रहे हैं। साथ ही “Make in India” कार्यक्रम के तहत रूस भारत में औद्योगिक उत्पादन बढ़ाएगा।
पुतिन ने कहा कि रूस–भारत संबंध सिर्फ रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षणिक और मानवीय स्तर पर भी गहरे हैं। दोनों देश स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हैं और BRICS तथा SCO जैसी संस्थाओं में मिलकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मज़बूत कर रहे हैं।
रूस दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की कड़ी पाबंदियों ने उसके तेल–गैस निर्यात को प्रभावित किया है। इसके बावजूद रूस ने भारत को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।






