Thursday, June 18, 2026
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धान में अनावश्यक डीएपी के प्रयोग से बचें, मिट्टी परीक्षण को बनाएं खेती का आधार: डॉ. गर्ग

फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव भूलण में किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित

मूनक, 18 जून, 2026 : खेती की लागत कम करने, मिट्टी की सेहत को बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के दिशा-निर्देशों के तहत फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव भूलण (मूनक के निकट) में किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।

शिविर के दौरान किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, धान एवं बासमती की पौध में जैव उर्वरकों के महत्व तथा धान में फास्फोरस उर्वरक के अनावश्यक उपयोग से बचने संबंधी वैज्ञानिक जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि अधिक लाभ के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहे। इस प्रशिक्षण शिविर में लगभग 30 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वरिष्ठ विस्तार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि फसल उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। उन्होंने मौके पर ही मिट्टी के नमूने लेने की विधि का प्रदर्शन किया और स्वयं नमूना लेकर किसानों को इसकी प्रक्रिया समझाई।

डॉ. गर्ग ने किसानों से धान और बासमती की फसलों में डीएपी उर्वरक के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा यूरिया का भी सीमित और आवश्यकता अनुसार प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से खेत की तैयारी से पहले 2-3 बोरी यूरिया डालने की प्रथा से बचने की सलाह दी। उन्होंने धान में जिंक की कमी को दूर करने के लिए अनुशंसित मात्रा में ही जिंक का उपयोग करने पर जोर दिया।

जैविक उर्वरकों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गर्ग ने बताया कि धान की पौध पर लगाया जाने वाला एजोस्पाइरिलम टीका फसल की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने धान की नर्सरी तैयार करने के लिए अनुशंसित उर्वरकों और अन्य कृषि प्रबंधन उपायों की भी विस्तृत जानकारी दी।

इस दौरान डॉ. गर्ग ने धान की पौध में बौनेपन (ड्वार्फ) रोग की पहचान और रोकथाम संबंधी सुझाव भी साझा किए तथा किसानों को नर्सरी की नियमित निगरानी करने के लिए प्रेरित किया।

शिविर की सफलता में श्री बाल कृष्ण का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में किसानों को प्रदर्शन के तौर पर एजोस्पाइरिलम टीके वितरित किए गए। कृषि साहित्य की बिक्री भी की गई। शिविर के दौरान किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न कृषि संबंधी प्रश्नों के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित उत्तर दिए गए।

अंत में डॉ. गर्ग ने श्री बाल कृष्ण द्वारा तैयार की गई विभिन्न धान और बासमती किस्मों की पौध का निरीक्षण किया तथा उनमें बौनेपन के वायरस रोग की संभावित मौजूदगी को लेकर सर्वेक्षण भी किया।

 

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