Saturday, June 13, 2026
HomePunjabगांव फुम्मणवाल में “संतुलित उर्वरक प्रबंधन” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

गांव फुम्मणवाल में “संतुलित उर्वरक प्रबंधन” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

पीएयू-केवीके ने खेत बचाओ मुहिमके तहत किसानों को धान में फास्फोरस खाद न डालने और जैव उर्वरकों के उपयोग के प्रति किया जागरूक

भवानीगढ़, 12 जून, 2026 : पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर द्वारा कृषि विभाग के सहयोग से गांव फुम्मणवाल, ब्लॉक भवानीगढ़ में “संतुलित उर्वरक प्रबंधन” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 50 किसानों ने भाग लिया।

इस शिविर के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसलों में उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों, विशेष रूप से यूरिया और फास्फोरस के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि यदि गेहूं की फसल में अनुशंसित मात्रा में डीएपी खाद डाली गई हो, तो खरीफ सीजन में धान की फसल में फास्फोरस युक्त उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने धान में यूरिया खाद के संतुलित उपयोग के लिए खेत में पानी भरने (पडलिंग) से पहले सूखी भूमि में इसके प्रयोग से बचने की सलाह भी दी।

उन्होंने बताया कि जिन खेतों में सनई (जंतर) की हरी खाद दबाई गई हो, वहां केवल आधी मात्रा में यूरिया डालनी चाहिए। इसी प्रकार, यदि मूंग की हरी खाद खेत में मिलाई गई हो तो यूरिया की मात्रा एक-तिहाई कम कर देनी चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि तथा धान की पौध की जड़ों पर लगाए जाने वाले एजोस्पिरिलम जैव उर्वरक के उपयोग और उसके लाभों के बारे में भी जानकारी दी।

डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) ने किसानों को फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उर्वरता बढ़ाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान की पारंपरिक रोपाई के विकल्प के रूप में मशीनों द्वारा रोपाई की तकनीक से भी अवगत कराया।

उन्होंने मशीन रोपाई के लिए धान की मैट टाइप नर्सरी तैयार करने के महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए। कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि संबंधी साहित्य वितरित किया गया।

इस जागरूकता शिविर को सफल बनाने में कृषि विभाग के अधिकारियों तथा गांव के सरपंच सुखचैन सिंह का विशेष योगदान रहा।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments