Friday, June 5, 2026
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डी.ए.वी. स्थापना दिवस पर सजी ज्ञान और संस्कारों की प्रदर्शनी

विद्यार्थियों ने रचा इतिहास के 139 गौरवशाली वर्षों का चित्रण

जाखल मंडी  01 जून, 2026 (संजीव शर्मा): बृज लाल जिंदल डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, जाखल मंडी में डी.ए.वी. स्थापना दिवस/फाउंडेशन डे हर्षोल्लास से मनाया गया।  इसकी शुरुआत 1 जून 1886 को लाहौर में स्वामी दयानंद सरस्वती की स्मृति में और महात्मा हंसराज के प्रयासों से हुई थी।यह भारत और विदेशों में सबसे बड़ा गैर-सरकारी शैक्षणिक संगठन है, जो डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति (DAVCMC) द्वारा संचालित होता है।इस अवसर पर स्कूल के विद्यार्थियों ने महात्मा हंसराज, स्वामी दयानंद सरस्वती पंडित गुरु दत्त विद्यार्थी और महात्मा आनंद स्वामी के जीवन और डी.ए.वी. के सिद्धांतों पर आधारित विभिन्न आकर्षक चार्ट बनाए।विद्यार्थियों ने “डी.ए.वी. के गौरवशाली 139 वर्ष” विषय पर 50 से अधिक चार्ट तैयार किए। महात्मा हंसराज के अनमोल वचन “मैं देश के लिए जीता हूं, देश के लिए मरूंगा” जैसे कथनों को सुलेख में लिखा।

चरित्र निर्माण, नशा मुक्ति, नारी शिक्षा व स्वदेशी पर आधारित मॉडल चार्ट।

डी.ए.वी.”, महात्मा हंसराज जी का चित्र रंगीन ड्राइंग, फूल-पत्तियों से सजावट “वेदों की ओर लौटो”, “नशा मुक्त भारत”, “डी.ए.वी. के 10 नियम” , स्लोगन l

बच्चों ने चार्ट के माध्यम से बताया कि डी.ए.वी. का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। कुछ चार्ट में “अनपढ़ थीं सिखाती बहुत थीं” विषय को भी दर्शाया गया, जिसमें माँ के संस्कारों को महात्मा हंसराज के आदर्शों से जोड़ा गया।

प्राचार्य जयदेव शर्मा जी ने चार्ट प्रदर्शनी का ऑनलाइन अवलोकन किया और बच्चों की सराहना की। उन्होंने कहा, “महात्मा हंसराज जी ने कहा था कि डिग्री से पहले इंसान बनो। आज इन चार्ट में बच्चों ने वही भाव दिखाया है। डी.ए.वी. की नींव सेवा, संस्कार और स्वदेशी पर टिकी है। स्थापना दिवस पर हम संकल्प लें कि हर बच्चा पहले अच्छा नागरिक बनेगा।”

प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा, आज डी.ए.वी. केवल एक नाम नहीं, एक आंदोलन है। महात्मा हंसराज जी ने अपना घर-बार त्याग कर शिक्षा की अलख जगाई। उन्होंने डिग्री नहीं, चरित्रवान मनुष्य बनाने का सपना देखा था। आज जब समाज नशे व मोबाइल की गिरफ्त में है, तब डी.ए.वी. का ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश और प्रासंगिक हो गया है। बच्चा घर से सीखता है, पर स्कूल उसे दिशा देता है। हमारे स्थापना दिवस का एक ही लक्ष्य है – संस्कारवान नागरिक बनाना।

 

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