नई दिल्ली, 30 मई 2026 : आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपये के नोट कागज के बजाय प्लास्टिक (पॉलीमर) से बने हो सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पारंपरिक कागजी नोटों को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोटों से बदलने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है।
बढ़ते नकदी प्रचलन और फटे-पुराने नोटों को बार-बार बदलने की समस्या को देखते हुए RBI पॉलीमर करेंसी को अपनाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार 100, 200 और 500 रुपये के पॉलीमर नोटों के लिए जल्द ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में इन नोटों को देश के चुनिंदा शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा, ताकि आम जनता और एटीएम मशीनों में उनकी स्वीकार्यता का आकलन किया जा सके।
यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश की मौजूदा कागजी मुद्रा को चरणबद्ध तरीके से पॉलीमर नोटों से बदला जा सकता है।
देश में डिजिटल भुगतान और UPI लेनदेन में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद नकदी की मांग लगातार बनी हुई है। वर्तमान में भारत में कुल मुद्रा प्रचलन लगभग 42.86 ट्रिलियन रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है, जिसका प्रबंधन करना केंद्रीय बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती है। कागजी नोट जल्दी गंदे हो जाते हैं, फट जाते हैं और पानी लगने से खराब हो जाते हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है।
कागजी नोटों की छपाई और पुराने नोटों को नष्ट करने पर हर साल सरकार और RBI को भारी खर्च उठाना पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में बैंक नोटों की छपाई पर लगभग 6,372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके विपरीत पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में लगभग चार से पांच गुना अधिक समय तक चलते हैं। हालांकि इनकी शुरुआती निर्माण लागत अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में पुनर्मुद्रण की लागत कम होने से बड़े पैमाने पर बचत संभव है।
पॉलीमर नोटों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ये पूरी तरह वाटरप्रूफ होते हैं। यदि गलती से कपड़ों के साथ धुल भी जाएं तो इनके खराब होने या फटने की संभावना बेहद कम होती है। इसके अलावा उपयोग के बाद इन नोटों को रीसायकल करके अन्य प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर करेंसी से नकदी प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा, नोटों की आयु बढ़ेगी और लंबे समय में सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।