लुधियाना, 15 मई 2026 : लुधियाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के मास्टरमाइंड दिल्ली और गुजरात के बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 लग्जरी कारें बरामद की हैं। इसके अलावा 300 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया गया है।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेशों में रहने वाले लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर स्क्रीन पर Microsoft के नाम पर फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। स्क्रीन पर नकली कस्टमर केयर नंबर भी दिखाया जाता था।
जब कोई व्यक्ति उस नंबर पर कॉल करता था, तो कॉल सीधे X-Lite सॉफ्टवेयर के जरिए आरोपियों तक पहुंच जाती थी। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर अल्ट्राव्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाते थे और पीड़ित के कंप्यूटर व मोबाइल का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।
इसके बाद गिरोह के सदस्य नकली स्कैन और फर्जी पॉप-अप दिखाकर लोगों को डराते थे। पीड़ितों को बताया जाता था कि उनका बैंक अकाउंट या ईमेल हैक हो चुका है या उनके कंप्यूटर में अश्लील सामग्री मिली है। इसी डर का फायदा उठाकर उनसे लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।
स्वपन शर्मा ने बताया कि 13 मई 2026 को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 132 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के कुछ कॉल सेंटर विदेशी नागरिकों के साथ ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं।
इसके बाद पुलिस ने संधू टावर और सिल्वर ओक के पास कई व्यावसायिक परिसरों में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकदी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और लग्जरी वाहन बरामद किए गए। मामले की जांच में आयकर विभाग को भी शामिल किया गया है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि प्रत्येक कॉल सेंटर में 8 से 10 टीमें बनाई गई थीं और हर टीम में 6 से 7 सदस्य काम करते थे। ‘ओपनर’ पीड़ितों को झांसे में लेकर सिस्टम एक्सेस हासिल करते थे, जबकि ‘क्लोजर’ खुद को बैंक अधिकारी बताकर पैसों का ट्रांसफर करवाते थे।
आरोपी नकद रकम की घर से पिकअप, सोना खरीदवाकर डोरस्टेप डिलीवरी, Amazon और Apple गिफ्ट कार्ड खरीदवाने, फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम भारत तक पहुंचाते थे।
शुरुआती जांच में पता चला है कि हर ऑपरेटर रोजाना औसतन 8 से 10 कॉल संभालता था। कर्मचारियों को फिक्स वेतन के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था। पुलिस अब डिजिटल सबूत, हवाला नेटवर्क, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, संपत्ति मालिकों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में युवक और युवतियां पकड़े गए। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सरगनाओं ने गरीब परिवारों से जुड़े युवाओं को जल्दी अमीर बनने का लालच देकर इस अवैध धंधे में शामिल किया था।