प्रधानमंत्री मोदी, पंजाब कभी किसी के आगे नहीं झुका और न ही कभी झुकेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
ईडी और भाजपा के इस अपवित्र गठजोड़ का अंत पंजाब से ही शुरू होगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
ईडी के छापे सिर्फ उन्हीं राज्यों में क्यों पड़ रहे हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है? मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
जब से बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून पास हुआ है, बौखलाई भाजपा हमें डराने और धमकाने के लिए हर रोज नए तरीके अपना रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
ईडी द्वारा संजीव अरोड़ा के घर पर साल में तीसरी बार छापेमारी की जा रही है; पहले भी कुछ नहीं मिला था और अब भी कुछ नहीं मिलेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और चुनाव आयोग का लगातार दुरुपयोग कर रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पंजाबियों ने प्रधानमंत्री मोदी को तीन काले कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर किया था; अब वे इसका बदला ले रहे हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
ईडी के छापों का उद्देश्य काला धन बरामद करना नहीं, बल्कि नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर करना है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
अशोक मित्तल के ठिकानों पर छापेमारी हुई, फिर उन्होंने ‘आप’ छोड़ भाजपा जॉइन कर ली और उन्हें Y-श्रेणी की सुरक्षा दे दी गई: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
संगरूर, 9 मई 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बार-बार की जा रही छापेमारी को लेकर भाजपा नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब केंद्रीय एजेंसियों के जरिए “डराने और बदले की राजनीति” के आगे कभी नहीं झुकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईडी ने संजीव अरोड़ा के घर पर एक साल के भीतर तीन बार और एक महीने के भीतर दो बार छापेमारी की, लेकिन कुछ भी बरामद नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे छापे सिर्फ उन्हीं राज्यों में क्यों डाले जा रहे हैं जहां भाजपा की सरकार नहीं है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का असली मकसद काला धन बरामद करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर करना है। उन्होंने कहा कि कई उदाहरण ऐसे हैं जहां एजेंसियों की कार्रवाई झेल रहे नेता बाद में भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिल गया।
उन्होंने कहा कि गुरुओं और शहीदों की धरती पंजाब, औरंगजेब के अत्याचारों के सामने भी नहीं झुकी थी और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने झुकेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा-ईडी गठजोड़ का पतन पंजाब से ही शुरू होगा।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), आयकर विभाग और यहां तक कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही हैं, बल्कि गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब, के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने इन संस्थाओं को राजनीतिक दबाव के औजार में बदल दिया है ताकि नेताओं, कारोबारियों और जनप्रतिनिधियों को डराया जा सके। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल अब भ्रष्टाचार उजागर करने के बजाय राजनीतिक बदले और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा पूरे देश में एक ही पैटर्न अपना रही है, जहां छापेमारी भ्रष्टाचार या काला धन पकड़ने के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जाती है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “भाजपा का संदेश बिल्कुल साफ है — या तो भाजपा में शामिल हो जाओ या फिर छापों और जांच का सामना करो।”
राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके घर, यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक संस्थानों पर दो दिनों तक छापेमारी हुई, लेकिन जैसे ही वे भाजपा में शामिल हुए, कार्रवाई बंद हो गई और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा कवच दे दिया गया। उन्होंने पूछा कि अगर यह एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग नहीं है तो और क्या है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में इस तरह की दबाव की राजनीति कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा, “हमने शुरुआत से ही संघर्षों का सामना किया है। पंजाब कभी भी धमकियों के आगे नहीं झुका और न ही झुकेगा।”
संजीव अरोड़ा के घर चल रही ईडी कार्रवाई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार की गई छापेमारी से कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक रूप से प्रेरित छापे केवल डर पैदा करने और विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों और शहीदों की पवित्र धरती है। यह धरती औरंगजेब के अत्याचारों के आगे नहीं झुकी और न ही मोदी के आगे झुकेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि ईडी और भाजपा के बीच “अनैतिक गठजोड़” का अंत पंजाब से शुरू होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि ईडी के छापे मुख्य रूप से विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में ही क्यों डाले जाते हैं, जबकि भाजपा शासित राज्य इससे अछूते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे ही ‘आप’ सरकार ने सख्त बेअदबी विरोधी कानून पारित किया, भाजपा बौखला गई और पंजाब की नेतृत्वकारी ताकतों को डराने की कोशिशें तेज कर दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “एक साल में तीसरी बार संजीव अरोड़ा के घर छापेमारी की गई है। पहले भी कुछ नहीं मिला था और अब भी कुछ नहीं मिलेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाबियों ने मोदी सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर किया था और अब केंद्र सरकार पंजाब को निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास अन्याय के खिलाफ लड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की गौरवशाली परंपरा है। उन्होंने कहा कि दबाव और धमकी की राजनीति कहीं और चल सकती है, लेकिन पंजाब में नहीं।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चंडीगढ़, भाखड़ा, नदी जल विवाद और पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों पर पंजाब के साथ अन्याय किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने आरडीएफ फंड समेत पंजाब के हजारों करोड़ रुपये रोक रखे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में पंजाब के योगदान के बावजूद राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश को अनाज देता है और पंजाबी जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।
फिरकापरस्ती की राजनीति का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का सामाजिक ढांचा भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित है। उन्होंने कहा, “पंजाब की धरती पर नफरत के अलावा हर चीज उग सकती है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी नहीं पनप सकता।”
बेअदबी विरोधी कानून पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और सभी धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह कानून धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को सख्त सजा देने के लिए लाया गया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस कानून को दुनियाभर की संगतों का समर्थन मिला है और केवल “एक खास परिवार” इसका विरोध कर रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू हो चुका है और इसे वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी विरोधी कानून लंबे समय से जनता की मांग थी और इसकी जरूरत को लेकर डेढ़ साल तक आंदोलन चलते रहे।
उन्होंने कहा कि जुलाई 2007 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी सरकार को ऐसा कानून बनाने के लिए अधिकृत किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले सख्त कानून की मांग करते थे, वही अब इसका विरोध कर रहे हैं और धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
पंजाब दबाव में बेअदबी विरोधी कानून वापस नहीं लेगा; “शुक्राना यात्रा” को मिल रहे भारी समर्थन से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर लोकतांत्रिक समूह को विरोध और बैठक करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी दबाव में कानून वापस नहीं लिया जाएगा।
“शुक्राना यात्रा” पर सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी के छापे और विवाद जानबूझकर यात्रा के दौरान कराए जा रहे हैं ताकि लोगों के भारी समर्थन से ध्यान हटाया जा सके।
उन्होंने भाजपा की “तानाशाही मानसिकता” की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा संस्थाओं से लेकर संस्कृति और सार्वजनिक अभिव्यक्ति तक हर चीज को नियंत्रित करना चाहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है। भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।”
उन्होंने कहा, “ईडी के छापे सिर्फ उन्हीं राज्यों में क्यों पड़ते हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है? यह लोकतंत्र की हत्या है। पंजाबियों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की राजनीति की जा रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब गुरुओं और संतों की धरती है। इस मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज कभी नहीं उग सकता।”
उन्होंने कहा कि बेअदबी विरोधी कानून पास होने के बाद भाजपा पूरी तरह बौखला गई है और पंजाब को डराने की कोशिश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करते रहेंगे। न हम झुकेंगे और न ही रुकेंगे।”






