चंडीगढ़, 1 मई 2026: भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना ने एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक करीब 1 लाख डायलिसिस सत्र पूरे कर लिए हैं। इस दौरान मरीजों को लगभग 16.5 करोड़ रुपये के इलाज का लाभ मिला है।
यह योजना खास तौर पर क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीजों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। इसके तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त डायलिसिस सुविधा दी जा रही है, जिससे लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों पर आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।
लुधियाना के मरीज ध्यान सिंह जैसे कई लोग, जिन्हें हफ्ते में कई बार डायलिसिस कराना पड़ता है, बताते हैं कि इस योजना से उनके खर्च में काफी कमी आई है। सेहत कार्ड के जरिए उन्हें कैशलेस इलाज मिल रहा है, जिससे उपचार में कोई रुकावट नहीं आती।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डायलिसिस जीवनरक्षक प्रक्रिया है, लेकिन यह बीमारी का स्थायी इलाज नहीं है। नियमित रूप से डायलिसिस कराना जरूरी होता है, क्योंकि एक भी सत्र छूटने पर गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। भारत में निजी अस्पतालों में एक डायलिसिस सत्र की लागत 1500 से 4000 रुपये तक होती है, जो कई मरीजों के लिए भारी पड़ती है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी मरीज पैसों की कमी के कारण डायलिसिस से वंचित न रहे। उन्होंने इस योजना को मरीजों के लिए निरंतर और सुलभ इलाज सुनिश्चित करने वाला कदम बताया।
डॉक्टरों का मानना है कि CKD अक्सर देर से पता चलती है, जिससे मरीजों को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि जहां ऐसी योजनाएं मरीजों को जीवन देने में मदद कर रही हैं, वहीं समय पर जांच और बचाव उपाय इस बीमारी से निपटने के लिए बेहद जरूरी हैं।






