80 सांसदों ने मांगा इस्तीफा, अमेरिका में महाभियोग का खतरा
वॉशिंगटन/तेहरान, 08 अप्रैल 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 40 दिनों से ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को रोकने का एक बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की है, जिसे मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले के बाद इजरायल भी ईरान के खिलाफ अपने हमले रोकने के लिए सहमत हो गया है। शांति वार्ता का अगला चरण पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में आयोजित किया जाएगा।
युद्ध थमा, पर ट्रंप के खिलाफ बगावत तेज
भले ही सीमा पर तोपें शांत हो गई हों, लेकिन अमेरिका के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। लंबे समय तक चली इस विनाशकारी जंग के कारण अब प्रशासन के अंदर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं।
- इस्तीफे की मांग: रिपोर्ट्स के अनुसार, 80 से अधिक प्रमुख सांसदों (Lawmakers) ने राष्ट्रपति ट्रंप से तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
- प्रशासन पर आरोप: विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन जानबूझकर युद्धविराम की कोशिशों में देरी कर रहा था। उनका दावा है कि खार्ग द्वीप और तेहरान पर हुए हमलों ने दुनिया को ‘तीसरे विश्व युद्ध’ के कगार पर ला खड़ा किया था।
महंगाई और आर्थिक संकट बनी वजह
वॉशिंगटन में हुई एक हंगामेदार बैठक के दौरान सांसदों ने राष्ट्रपति की आक्रामक विदेश नीति पर कड़े सवाल उठाए। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- बर्बाद होती अर्थव्यवस्था: सांसदों का कहना है कि युद्ध के जुनून में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचा है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
- जनता का गुस्सा: अमेरिका के कई बड़े शहरों में ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग इस बात से नाराज हैं कि देश में महंगाई चरम पर है, जबकि अरबों डॉलर युद्ध की आग में झोंके जा रहे हैं।
- महाभियोग का खतरा: यदि विपक्षी दल एकजुट होते हैं, तो राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया: व्हाइट हाउस ने इन सभी आरोपों और इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को रोकना अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।






