नई दिल्ली/मंगलुरु, 22 मार्च 2026: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पूरे एशिया में तेल और गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भारत भी इस समय एलपीजी (LPG) संकट से जूझ रहा है, लेकिन इस बीच राहत भरी खबर सामने आई है। रविवार, 22 मार्च को ‘पाइक्सिस पायनियर’ (Pyxis Pioneer) नामक एक विशाल जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुँच गया है। रिपोर्टों के अनुसार, अगले एक हफ्ते के भीतर न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर कुल 72,700 टन एलपीजी पहुँचने की उम्मीद है, जिससे देश में गैस की किल्लत काफी हद तक कम हो जाएगी।
गैस आपूर्ति की यह प्रक्रिया रविवार से शुरू हो चुकी है। सिंगापुर के ध्वज वाला जहाज ‘पाइक्सिस पायनियर’ 16,714 टन एलपीजी लेकर पहुँचा है। यह जहाज 14 फरवरी को नीदरलैंड के बंदरगाह से रवाना हुआ था और अब यह ‘एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड’ के लिए गैस उतार रहा है। इसके बाद, 25 मार्च को ‘अपोलो ओशन’ नामक एक अन्य टैंकर 26,687 टन गैस लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुँचेगा। यह खेप इंडियन ऑयल (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के लिए होगी। वियतनामी ध्वज वाला यह जहाज गुजरात के वादीनार बंदरगाह से होते हुए यहाँ पहुँचेगा।
आपूर्ति की इस कड़ी में 29 मार्च को अमेरिका से भी एक टैंकर लगभग 30,000 टन एलपीजी लेकर पहुँचने वाला है, जो हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के लिए निर्धारित है। मंगलुरु स्थित एचपीसीएल का एलपीजी प्लांट इस गैस को पाइपलाइन के माध्यम से स्थानीय बॉटलिंग प्लांटों और बेंगलुरु सहित अन्य प्रमुख शहरों में सप्लाई करता है। जानकारों का मानना है कि न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर अगले कुछ दिनों में गैस की इन बड़ी खेपों के पहुँचने से घरेलू और औद्योगिक गैस वितरण की स्थिति में बड़ा सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को मिल रही दिक्कतों से राहत मिलेगी।






