चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह दिन 21 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा साहस की कामना करते हैं।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और अद्भुत है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा सुशोभित होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका रंग स्वर्ण के समान चमकीला है और वे सिंह पर सवार रहती हैं। माँ के दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जो बुराइयों के नाश का प्रतीक हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मविश्वास और वीरता का संचार होता है। साथ ही जीवन के सभी भय और नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जो मानसिक तनाव या भय से जूझ रहे हैं।
इस दिन पूजा के दौरान “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तजन माँ को दूध, खीर और मिठाई का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा की कृपा से साधक को शांति, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष के अनुसार, माँ चंद्रघंटा का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से कुंडली में मंगल दोष भी शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवरात्रि का तीसरा दिन हमें यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, हमें साहस और विश्वास के साथ उनका सामना करना चाहिए। माँ चंद्रघंटा की आराधना से न केवल आध्यात्मिक शक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सफलता के मार्ग भी प्रशस्त होते हैं।






