केंद्र सरकार ने बढ़ाई एक्साइज ड्यूटी
नई दिल्ली, 1 जनवरी 2025 : सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के शौकीनों को बड़ा झटका लगने वाला है। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च और तंबाकू क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही राजस्व लीकेज का हवाला देते हुए एक्साइज ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके चलते 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की कीमतों में बड़ा इजाफा होगा।
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सेंट्रल एक्साइज एक्ट और सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) एक्ट, 2025 के तहत अधिसूचनाएं जारी करते हुए तंबाकू उत्पादों के लिए एक्साइज ड्यूटी ढांचे में व्यापक बदलाव की घोषणा की। यह जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद वर्ष 2017 से अब तक का पहला बड़ा संशोधन है।
नई व्यवस्था के तहत सिगरेट पर उनकी लंबाई और श्रेणी के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी। यह ड्यूटी मौजूदा जीएसटी (जो 40 प्रतिशत तक है) के अलावा होगी, जिससे कुल कर बोझ काफी बढ़ जाएगा और खुदरा कीमतों में तेज उछाल आने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी और फिल्टर सिगरेट की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होगी, क्योंकि कंपनियां अतिरिक्त कर भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालेंगी। गौरतलब है कि पिछले करीब सात वर्षों से सिगरेट पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ था। जीएसटी से पहले, सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में नियमित संशोधन किया जाता था।
सरकार के इस फैसले से तंबाकू उत्पादों पर दोहरी कर व्यवस्था प्रभावी हो गई है, जिसमें जीएसटी के साथ-साथ विशिष्ट एक्साइज ड्यूटी भी शामिल होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी ऐसी दोहरी कर व्यवस्था को वैध ठहरा चुका है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने सभी तंबाकू उत्पादों पर लगने वाला जीएसटी मुआवजा उपकर (GST Compensation Cess) खत्म कर दिया है और इसकी दर शून्य कर दी गई है। साथ ही जीएसटी स्लैब को भी सरल किया गया है—अब तंबाकू उत्पादों पर 18 प्रतिशत या 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि पहले लागू 28 प्रतिशत स्लैब को हटा दिया गया है।
धुआं रहित तंबाकू उत्पादों जैसे चबाने वाला तंबाकू, जर्दा और गुटखा भी महंगे होंगे। इनके लिए मशीन क्षमता आधारित एक्साइज ड्यूटी लागू की गई है। नए पैकिंग मशीन नियम, 2026 के तहत अब इन उत्पादों पर टैक्स पैकिंग मशीनों की संख्या, गति, उत्पादन क्षमता और उत्पाद के खुदरा मूल्य के आधार पर तय किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह कदम तंबाकू उद्योग के अत्यधिक मशीनीकरण और नकद आधारित क्षेत्रों में टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। जीएसटी से पहले भी इस तरह की व्यवस्था लागू थी, जिसे अब दोबारा सख्त अनुपालन के लिए लाया गया है।
सरकार ने कहा कि संशोधित कर ढांचा वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य सिफारिशों के अनुरूप है, जिनमें तंबाकू उत्पादों पर नियमित रूप से एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की सलाह दी जाती है, ताकि महंगाई और बढ़ती आय के असर को संतुलित किया जा सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तंबाकू से जुड़ी बीमारियां, खासकर कैंसर, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर लगातार बढ़ता आर्थिक बोझ डाल रही हैं।
सभी नए प्रावधान 1 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इससे पहले कंपनियों और वितरकों को सीमित समय दिया गया है ताकि वे कीमतों में संशोधन, अनुपालन प्रणाली अपडेट करने और उत्पादन योजनाओं में बदलाव कर सकें।






