बीमा कंपनियां मुआवजा देने से नहीं कर सकतीं इनकार
चंडीगढ़ 27 दिसंबर 2025: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि ड्राइविंग लाइसेंस उसकी समाप्ति तिथि के तुरंत बाद अमान्य नहीं हो जाता। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद भी 30 दिनों का कानूनी ग्रेस पीरियड मिलता है, जिसके दौरान लाइसेंस को वैध माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस 30 दिन की अवधि के भीतर कोई सड़क दुर्घटना होती है, तो बीमा कंपनी केवल इस आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकती कि ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त हो चुकी थी।
यह मामला 4 जुलाई 2001 को हरियाणा के जींद जिले में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया था और बीमा कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को चालक से मुआवजे की राशि वसूलने की अनुमति भी नहीं दी थी।
बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ड्राइवर का लाइसेंस 4 जून 2001 को समाप्त हो गया था, जबकि हादसा 4 जुलाई 2001 को हुआ। कंपनी का कहना था कि लाइसेंस का नवीनीकरण 6 अगस्त 2001 को कराया गया, इसलिए दुर्घटना के समय चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून के तहत मिलने वाले 30 दिन के ग्रेस पीरियड के दौरान लाइसेंस वैध रहता है और इस आधार पर बीमा दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता।






