साहित्य कलश पब्लिकेशन एवं पत्रिका की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन जी के इंस्टिट्यूट पटियाला के प्रांगण में किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ महेश गौतम शिरोमणि संस्कृत साहित्यकार एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर अलका अरोड़ा, पवन गोयल एवं प्रिंसिपल मंजू ने शिरकत की। नियत समय पर गोष्ठी का प्रारंभ मंच को सुसज्जित कर एवं माँ सरस्वती के पावन चरणों में नमन के साथ शमा रोशन करने की प्रथा को निभाते हुए किया गया। उसके बाद मंच संचालक बजिंदर ठाकुर ने सभी का अभिवादन एवं स्वागत करते हुए विधिवत काव्य गोष्ठी का आग़ाज़ किया। करीब 40 साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से माहौल को पूर्ण रूप से काव्य रस में सराबोर कर दिया।
सर्वप्रथम साहित्य कलश पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित डॉ अजय सिंगला की पुस्तक ‘कवितामय राम कथा’ का विमोचन किया गया। शिरोमणि संस्कृत साहित्यकार डॉ महेश गौतम ने डॉ अजय सिंगला को उनके पुस्तक के विमोचन पर मुबारक बाद दी और उनके कार्य को बहुत सराहा और कहा कि सब के कल्याण हेतु मंगलकारी विषय पर लिखना समाज के उत्थान में अपना सहयोग देना है इस लिए एक आत्मिक भक्ति भाव की आवश्यकता है। इसके पश्चात मनु वैश्य एवं दिनेश सूद ने पुस्तक पर समीक्षा प्रस्तुत की। मनु वैश्य ने पूरी पुस्तक की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा इस पुस्तक का हरेक शव्द दिल पर दस्तक देता है और आज के दौर में ऐसी पुस्तक हर पुस्तकालय का हिस्सा होनी चाहिए। दिनेश सूद ने डॉ अजय सिंगला को मुबारकबाद देते हुए कहा कि मुझे ये पुस्तक पढ़ते हुए बहुत ख़ुशी एवं आनंद महसूस हुआ और लगा कि आज के दौर में भी साहित्यकारों में तुलसी दास जैसी भावना जीवंत है। उसके बाद अलका अरोड़ा ने इस पुस्तक के लिखने से लेकर प्रकाशित होने की यात्रा के बारे में बताया। डॉ मोनिका सिंगला ने सभी का इस पुस्तक की विमोचन का भाग बनने के लिए धन्यवाद किया।
मंचासीन मंजू मैम ने साहित्य कलश के द्वारा किए जाने वाले कार्यों के लिए सागर सूद की काफ़ी तारीफ़ की। पवन गोयल ने साहित्य कलश द्वारा किए जाने वाले साहित्यक कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा कि उन्हें हर माह इंतज़ार होता है इस काव्य गोष्ठी का। उसके बाद डॉ अजय सिंगला ने अपनी इस पुस्तक के लेखन की यात्रा को साँझा किया ।
इसके बाद आये हुए सभी साहित्यकारों वरिंदर कौर, पुनीत गोयल, खुशप्रीत, अमनदीप सिंह, वीणा सूद, शशि सूद, कुलविंदर कुमार, कृष्ण धीमान, इन्दर पॉल सिंह, विजय कुमार, सतीश विद्रोही, हरदीप सभरवाल, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, श्रवण वर्मा, संजय दर्दी, डॉ जयदीप, अनुरीत भट्टी, परमजीत अग्रवाल, अमृतसर से विशेष तौर पर पधारी डॉ अनिशा अंगिरा अंगरा, बजिंदर ठाकुर, सागर सूद संजय, हरिदत्त हबीब, परविंदर शोख़ के इलावा रितु रानी, राजेंदर सिंह, गुरप्रीत ढिल्लों, राजेश कोटिआ ने अपनी अपनी रचनाओं से ख़ूब वाह वाही बटोरी।
मंचासीन सभी अतिथियों ने सागर सूद एवं साहित्य कलश को ऐसे ही बढ़ते रहने की शुभ कामनाएं दी और साहित्य के क्षेत्र में उनके प्रयास की भूरि भूरि प्रशंसा की। अंत में सागर सूद ने सबका धन्यवाद किया और अपनी ख़ूबसूरत ग़ज़ल पेश की।
हमेशा की तरह साहित्य कलश परिवार के सदस्यों का केक काटकर जन्मदिन मनाया गया। साहित्य कलश का हर महीने निर्विघ्न काव्य गोष्ठी आयोजित करना एक बेहद सहारनीय कार्य है. आज के समय में, जब सोशल मीडिया ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया हुआ है। अगर एक लाइन में इस गोष्ठी को समाहित करना हो तो यह एक सशक्त काव्य गोष्ठी रही जिसमे समाज के उत्थान और सबको साथ लेकर चलने की भावना मिश्रित थी।









