Saturday, June 6, 2026
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कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की नवीन तकनीकों की जानकारी देने के लिए जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कैंप लगाया

संगरूर, 08 मई 2026: आज खरीफ 2026 की फसलों, फसल विविधता और फसल अवशेष प्रबंधन संबंधी नवीन तकनीकी जानकारी देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कैंप धूरी में आयोजित किया गया, जिसमें जिले भर से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

इस कैंप में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के ओएसडी सुखवीर सिंह उच्चेचे पहुंचे। कैंप का उद्घाटन डिप्टी कमिश्नर संगरूर पूनमदीप कौर द्वारा किया गया। कैंप की अध्यक्षता डॉ. अरुण कुमार, संयुक्त निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंजाब ने की। विशेष अतिथियों के रूप में श्री महिंदर सिंह सिद्धू चेयरमैन पनसीड, डॉ. राजवंत सिंह घुल्ली चेयरमैन मार्केट कमेटी धूरी, सरदार रणजोध सिंह कांझला चेयरमैन ब्लॉक समिति धूरी, श्री अशोक कुमार लखा चेयरमैन पंजाब गौसेवा आयोग, श्री अनवर भसौड़ सदस्य पंजाब वक्फ बोर्ड तथा श्री हरजिंदर सिंह कांझला सदस्य जिला परिषद ने विशेष रूप से शिरकत की।

कैंप में आए अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य कृषि अधिकारी संगरूर धर्मिंदरजीत सिंह सिद्धू ने विभाग की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी।

उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी गई सिफारिशों को अपनाएं तथा खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री, डेयरी, बागवानी और फूलों की खेती जैसे सहायक व्यवसाय भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन से जहां भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, वहीं प्रदूषण कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि संगरूर स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला से मिट्टी की जांच करवाकर रिपोर्ट के अनुसार ही खादों का उपयोग किया जाए, ताकि अनावश्यक खर्चों से बचा जा सके।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक कृषि ने कैंप में शामिल विभिन्न सेल्फ हेल्प ग्रुपों, सहकारी समितियों और प्रगतिशील किसानों को कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि खेती की आय बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग और मार्केटिंग कौशल बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 के लिए खाद, बीज और कीटनाशकों के पर्याप्त प्रबंध सरकार द्वारा किए गए हैं और बुवाई के समय किसी भी कृषि इनपुट की कमी नहीं आने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती तकनीकी ज्ञान और नई तकनीकों पर आधारित है, इसलिए किसानों को विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण कैंपों में भाग लेना चाहिए। साथ ही पर्यावरण, भूमि और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संतुलित उपयोग पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

कृषि विकास अधिकारी डॉ. दमनप्रीत सिंह ने मंच संचालन करते हुए किसानों से अपील की कि बीज, खाद और कीटनाशकों की खरीद के समय विक्रेता से पक्का बिल अवश्य लें। उन्होंने पानी की बचत और खेती लागत कम करने के लिए किसानों को सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार धान की नर्सरी और बुवाई करने के लिए प्रेरित किया।

सहायक कृषि इंजीनियर गुरिंदर सिंह ने कृषि मशीनरी और सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी संबंधी जानकारी दी।

इस दौरान धूरी ब्लॉक के गांव कहेरू के प्रगतिशील किसान अमृतपाल सिंह कहेरू और संगूर ब्लॉक के गांव कुन्नरां के गुरमीत सिंह ने पराली प्रबंधन संबंधी अपने अनुभव साझा किए। वहीं गांव घनौर कलां के सरपंच जसविंदर सिंह और लहरागागा ब्लॉक के गांव कालबंजारा के राजविंदर सिंह ने अपनी सफल खेती की कहानियां किसानों से साझा कीं।

तकनीकी सत्र के दौरान पीएयू और कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। केवीके खेड़ी के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उन्नत बीजों के महत्व पर प्रकाश डाला। केवीके पटियाला के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हरदीप सिंह ने खरीफ फसलों में कीट और रोग नियंत्रण संबंधी जानकारी दी। डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह ढालीवाल ने उन्नत बीजों और खेती की आधुनिक विधियों पर चर्चा की, जबकि फार्म सलाहकार सेवा केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने मिट्टी और पानी की जांच के महत्व के बारे में जानकारी दी।

कैंप में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा प्रदर्शनियां भी लगाई गईं। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों और समस्याओं का मौके पर समाधान किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथियों द्वारा खेती और सहायक व्यवसाय अपनाने तथा पराली प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 86 किसानों, महिला किसानों और सेल्फ हेल्प ग्रुपों को सम्मानित किया गया।

कैंप में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। अंत में जिला प्रशिक्षण अधिकारी सुरिंदर कुमार ने सभी अतिथियों, किसानों, महिला किसानों, सेल्फ हेल्प ग्रुपों, प्रेस प्रतिनिधियों और स्टाफ का सफल आयोजन के लिए धन्यवाद किया।

 

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