नई दिल्ली, 20 नवंबर 2025: देश की राजनीति पर व्यापक असर डालने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने के लिए किसी तय समयसीमा में बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी कोई भी समयसीमा संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है।
मुख्य न्यायाधीश ब्रजेश गवई (CJI BR Gavai) की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पीठ में शामिल अन्य जज थे — जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर।
पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल संवैधानिक पद हैं और उनकी कार्यवाही संविधान द्वारा निर्देशित होती है। ऐसे में उनके ऊपर किसी तरह की समयसीमा थोपना “संविधान के प्रावधानों और उसकी आत्मा के सख्त खिलाफ” है।
यह फैसला उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब कई राज्यों में राज्यपालों द्वारा विधेयकों को लंबित रखने के मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ते रहे हैं।






