चंडीगढ़, 1 मार्च 2026: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में आज सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाया से जुड़े मामले में अहम सुनवाई हुई। अदालत के सख्त रुख को देखते हुए पंजाब के वित्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा।
सुनवाई के दौरान वित्त सचिव ने मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने विचार के लिए लिया।
क्या है मामला?
यह सुनवाई निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर हो रही है, जिसमें राज्य सरकार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि IAS, IPS, IFS और न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार समय पर DA की किस्तें मिल रही हैं।
वहीं, आम कर्मचारियों और पेंशनरों को जुलाई 2023 के बाद की किस्तें अब तक जारी नहीं की गई हैं।
हाईकोर्ट के तीखे सवाल
अदालत ने राज्य सरकार से कई अहम सवालों के जवाब मांगे हैं, जिनमें शामिल हैं:
क्या ऑल इंडिया सर्विसेज और न्यायिक अधिकारियों को उसी कंसोलिडेटेड फंड से वेतन दिया जाता है, जिससे अन्य कर्मचारियों को?
1 जुलाई 2023 से 1 जुलाई 2025 तक कितनी DA किस्तें बकाया हैं?
उच्च अधिकारियों को किस तारीख तक DA का भुगतान किया जा चुका है?
याचिकाकर्ताओं के वकील सन्नी सिंगला ने अदालत को बताया कि सरकार ने 2023 में सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर भेदभाव जारी है। उन्होंने कहा कि 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्र के बराबर DA देना अनिवार्य है, लेकिन राज्य सरकार इसमें लगातार देरी कर रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले 13 मार्च को हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने पंजाब सरकार को सभी बकाया राशि 30 अप्रैल तक 6% ब्याज सहित चुकाने के निर्देश दिए थे।
मामले की अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और हलफनामे पर कोर्ट की नजर रहेगी, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलने की उम्मीद है।






