चंडीगढ़, 1 अप्रैल 2026: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर एक ऐतिहासिक और सख्त आदेश जारी करते हुए हरियाणा में पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने न केवल संबंधित मामले में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई, बल्कि राज्यभर में अदालत की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया। अदालत ने यह फैसला राज्य में घटते वन क्षेत्र पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि हरियाणा में वन क्षेत्र देश में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो गंभीर पर्यावरणीय संकट का संकेत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी अनुमति के बिना कहीं भी पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती।
यह मामला जीरकपुर-पंचकूला एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना से जुड़ा है, जिस पर जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट ट्राइसिटी क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 17.57 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग परिवर्तन और 5,000 से अधिक पेड़ों की कटाई की योजना है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इससे पंचकूला के प्रमुख हरित क्षेत्र प्रभावित होंगे, जिनमें पंचकूला गोल्फ कोर्स, सेक्टर 1ए ग्रीन बेल्ट और घग्गर नदी के आसपास के वन क्षेत्र शामिल हैं।
इन क्षेत्रों को ट्राइसिटी का “हरा फेफड़ा” माना जाता है, जो वायु गुणवत्ता और जैव विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने न केवल तत्काल राहत दी, बल्कि राज्य सरकार और संबंधित विभागों को कड़ा संदेश भी दिया कि पर्यावरण सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






