Sunday, June 7, 2026
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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से आम जनता व किसानों पर बोझ होगा कम : सुभाष बराला

फ़तेहाबाद, 27 मार्च, 2026 (संजीव शर्मा) : राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई भारी कटौती का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और जनहितकारी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई के बीच आम नागरिकों के साथ-साथ किसानों को भी बड़ी राहत देने वाला है।
बराला ने बताया कि सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे परिवहन लागत घटेगी और इसका सीधा लाभ किसानों, व्यापारियों व आम उपभोक्ताओं को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढक़र 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस अप्रत्याशित वृद्धि के चलते दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है—दक्षिण-पूर्व एशिया में 30 से 50 प्रतिशत तक, उत्तर अमेरिका में करीब 30 प्रतिशत, यूरोप में लगभग 20 प्रतिशत और अफ्रीका में 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात में भारत एक अपवाद बनकर उभरा है, जहां सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सीधे जनता पर डालने के बजाय राहत देने का रास्ता चुना है। यह निर्णय न केवल आर्थिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास है, बल्कि आम नागरिकों के हितों की रक्षा का भी प्रतीक है।
बराला ने विशेष रूप से किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समय फसलों की कटाई का सीजन चल रहा है और आने वाले समय में किसान नई बुआई की तैयारी भी करेंगे। ऐसे में डीजल की खपत बढ़ जाती है, क्योंकि ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, सिंचाई पंप और ढुलाई जैसे सभी कार्यों में डीजल का व्यापक उपयोग होता है। डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होने से किसानों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अन्य देशों की तरह कीमतें बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला जाए, या फिर खुद वित्तीय दबाव सहते हुए राहत दी जाए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और जनहित को प्राथमिकता दी है।
बराला ने बताया कि इस निर्णय से तेल कंपनियों पर पडऩे वाले दबाव को भी संतुलित किया जा सकेगा, जबकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने अपने कर राजस्व में कटौती कर आमजन के हित को सर्वोपरि रखा है।
साथ ही सरकार ने डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया है, ताकि देश में इनकी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अनुचित लाभ न उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय दर्शाता है कि केंद्र सरकार कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भी आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए आम जनता और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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