फ़तेहाबाद , 14 फरवरी 2026 (संजीव शर्मा) : राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने शुक्रवार को राज्यसभा में हरियाणा में लागू एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली तथा उसके मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के साथ किए गए एकीकरण का मुद्दा उठाते हुए इसे पारदर्शी और जवाबदेह शासन का प्रभावी उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल पहल उर्वरक वितरण एवं सब्सिडी प्रबंधन में संरचनात्मक सुधार का प्रतीक है, जिसने वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों के हितों की भी रक्षा की है।
सांसद ने सदन को अवगत कराया कि एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली और मेरी फसल मेरा ब्यौरा के एकीकरण से किसान पंजीकरण, भूमि व फसल का डिजिटल सत्यापन, उर्वरक वितरण तथा सब्सिडी निगरानी की समस्त प्रक्रिया एक ही प्रमाणिक डिजिटल मंच से जुड़ गई है। अब यूरिया, डीएपी तथा अन्य सब्सिडी युक्त उर्वरक केवल तभी वितरित किए जाते हैं, जब पीओएस मशीन पर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल में दर्ज भूमि एवं फसल विवरण का विधिवत मिलान हो जाता है। इस तकनीकी व्यवस्था ने अनधिकृत खरीद, अतिरिक्त उपयोग तथा उर्वरक डायवर्जन जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने के बाद सार्वजनिक धन की उल्लेखनीय बचत दर्ज की गई है। 8 अक्टूबर 2025 के बाद उर्वरकों की खपत में तार्किक कमी आने से भारत सरकार को लगभग 700 करोड़ की अनुमानित सब्सिडी बचत प्राप्त हुई है। यह बचत इस बात का प्रमाण है कि अब सब्सिडी वास्तविक और सत्यापित कृषि उपयोग तक ही सीमित हो रही है।
सांसद बराला ने यह भी बताया कि यह मॉडल रीयल-टाइम डेटा के आधार पर उर्वरक मांग का सटीक आकलन करने, बेहतर लॉजिस्टिक्स योजना बनाने तथा समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हुआ है। इससे किसानों को आवश्यक उर्वरक समय पर प्राप्त हो रहे हैं और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा के इस सफल मॉडल का विस्तृत अध्ययन कर इसे अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार किया जाए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था अधिक पारदर्शी, कुशल, जवाबदेह और टिकाऊ बन सके।






