पटियाला, 11 जून 2026: मुख्य कृषि अधिकारी पटियाला डॉ. दारा सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष धान की फसल में बौने पौधों (स्टंटिंग) की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पिछले कई वर्षों से इसके कारणों का पता लगाने के लिए लगातार शोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पौधों का बौना रह जाना धान के एक नए विषाणुजनित रोग के कारण होता है, जो सफेद पीठ वाले फुदके (White Backed Planthopper) के माध्यम से फैलता है और धान की वर्तमान सभी किस्मों पर हमला कर सकता है।
इस रोग से प्रभावित पौधे बौने रह जाते हैं, उनके पत्ते नुकीले हो जाते हैं तथा जड़ें कम गहराई तक विकसित होती हैं। प्रभावित पौधों की ऊंचाई सामान्य पौधों की तुलना में आधी या एक-तिहाई रह जाती है। रोग का अधिक प्रकोप होने पर कई बार पौधे मुरझाकर सूख भी जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत में गहराई में दबा देना चाहिए।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि खेत में इस रोग को फैलाने वाले कीट (सफेद पीठ वाले फुदके) की प्रभावी रोकथाम के लिए धान की फसल का समय-समय पर निरीक्षण करते रहना चाहिए। फुदके की आमद का पता लगाने के लिए रात के समय खेत के पास बल्ब जलाकर रखना चाहिए।
यदि फुदके की उपस्थिति दिखाई दे तो निम्नलिखित किसी एक कीटनाशक का प्रयोग किया जा सकता है:
- पैक्सालोन 10 एस.सी. – 94 मि.ली. प्रति एकड़
- उलाला 50 डब्ल्यू.जी. – 60 ग्राम प्रति एकड़
- ओसीन/टोकन/डोमिनेंट 20 एस.जी. – 80 ग्राम प्रति एकड़
- चैस 50 डब्ल्यू.जी. – 120 ग्राम प्रति एकड़
- ऑर्केस्ट्रा 10 एस.सी. – 400 मि.ली. प्रति एकड़
- इमेजिन 10 एस.सी. – 300 मि.ली. प्रति एकड़
इन दवाओं को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से पौधों के आधार (जड़ों के पास) पर छिड़काव करें। प्रभावी नियंत्रण के लिए बैकपैक (पिट्ठू) पंप और गोल नोजल का उपयोग करें। कीटनाशकों का छिड़काव केवल आवश्यकता अनुसार ही किया जाना चाहिए।
किसी भी प्रकार की समस्या के लिए किसान अपने संबंधित ब्लॉक के कृषि विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं:
- ब्लॉक पटियाला: डॉ. गुरमीत सिंह – 97791-60950
- ब्लॉक नाभा: डॉ. जुपिंदर सिंह गिल – 97805-60004
- ब्लॉक भुनरहेड़ी: डॉ. मनदीप सिंह – 70092-27488
- ब्लॉक समाना: डॉ. सतीश कुमार – 97589-00047
- ब्लॉक राजपुरा: डॉ. जुपिंदर सिंह पन्नू – 73070-59201
- ब्लॉक घनौर: डॉ. रणजोध सिंह – 99883-12299
मुख्य कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे धान की फसल का नियमित निरीक्षण करें और किसी भी असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या विशेषज्ञों से संपर्क करें, ताकि फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।






