नई दिल्ली, 4 जून 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी गई। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में आई भारी उछाल के बीच केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। सरकार के अनुसार, यह सहायता राशि ओएमसी को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि एटीएफ की बढ़ती और अस्थिर कीमतों के कारण उन्हें होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके। यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से दी जाएगी।
सरकार ने बताया कि एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट योजना 36 महीनों तक लागू रहेगी। हालांकि इसकी हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक सहायता राशि की पूरी वसूली एवं समायोजन नहीं हो जाता।
योजना के तहत शामिल एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्षों तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ खरीदना होगा। सरकार का मानना है कि इससे एयरलाइंस को ईंधन लागत का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी और वे अपने परिचालन तथा वित्तीय योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकेंगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर करीब 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। महज दो महीनों में कीमतों में करीब ढाई गुना वृद्धि ने एयरलाइंस की परिचालन लागत पर भारी दबाव डाल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के इस कदम से विमानन उद्योग को राहत मिलेगी और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद हवाई सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।






