संगरूर, 03 जून 2026: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर द्वारा निदेशक प्रसार शिक्षा, पीएयू लुधियाना तथा आईसीएआर-अटारी, जोन-1, लुधियाना के दिशा-निर्देशों के तहत ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई।
इस संबंध में जानकारी देते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि एक माह तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ गांवों में जाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक प्रबंधन, यूरिया एवं फॉस्फोरस उर्वरकों की बचत, जैव उर्वरकों एवं हरी खाद के उपयोग के लाभ, टिकाऊ खेती की नई तकनीकों, जैविक खेती तथा खेती की लागत कम करने संबंधी जानकारी देंगे।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत गांव सारों, ब्लॉक संगरूर में एक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने, गोबर की खाद, हरी खाद तथा जैविक खादों के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह ने बताया कि यदि पिछली गेहूं की फसल में डीएपी की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग किया गया हो, तो खरीफ मौसम में धान और बासमती फसल के लिए फॉस्फोरस उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा उन्होंने किसानों को धान में एकीकृत खरपतवार प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
वहीं, डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) ने किसानों को धान की मशीन द्वारा रोपाई के लिए मैट टाइप नर्सरी तैयार करने की विधि और रोपाई के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी।
शिविर के अंत में किसानों के धान की खेती से संबंधित विभिन्न सवालों के जवाब भी दिए गए।