चंडीगढ़ , 27 मई 2026 : लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही को मंगलवार को चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन स्थित पश्चिमी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ (CoS) नियुक्त किया गया। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के अनुसार, उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा का स्थान लिया है, जिन्हें सेना मुख्यालय में डायरेक्टर जनरल स्ट्रैटेजिक प्लानिंग नियुक्त किया गया है।
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल साही ने वीर स्मृति वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ऑपरेशनल तैयारी, क्षमता विकास तथा सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
लेफ्टिनेंट जनरल साही पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा और भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1988 में उन्हें 23वीं बटालियन, द राजपूत रेजिमेंट में कमीशन मिला था और वर्तमान में वह द राजपूत रेजिमेंट के कर्नल के प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं।
उन्होंने उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों सहित सियाचिन ग्लेशियर में व्यापक ऑपरेशनल अनुभव हासिल किया है। जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल और काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) में उन्होंने अपनी बटालियन और इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली।
लेफ्टिनेंट जनरल साही को भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर मानी जाने वाली 3 कोर की कमान संभालने का भी गौरव प्राप्त है। इस कोर की जिम्मेदारी पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के छह राज्यों तक फैली हुई है। मई 2023 में मणिपुर में हुए जातीय संघर्ष के दौरान उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और बुनियादी ढांचे के उन्नयन में अहम भूमिका निभाई।
इससे पहले वह आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में संस्थान को 15 जनवरी 2026 को चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन से सम्मानित किया गया।
उन्होंने सेना मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन और महानिदेशक सूचना युद्ध जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है।
लेफ्टिनेंट जनरल साही ने डीएसएससी वेलिंगटन, आर्मी वॉर कॉलेज महू और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली से कई महत्वपूर्ण सैन्य पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। उनके पास दो एमफिल डिग्रियां और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में मास्टर डिग्री है।
उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।






