Saturday, June 6, 2026
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पीएयू-कृषि विज्ञान केंद्र ने मनाया खेत दिवस

खरबूजे की नई किस्म “पंजाब अमृत” के बारे में किसानों को दी जानकारी
धुरी, 23 मई,2026 : पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र,संगरूर द्वारा सब्जी विज्ञान विभाग, पीएयू लुधियाना के सहयोग से गांव भड़ी मानसा, तहसील धूरी, जिला संगरूर में किसान बलविंदर सिंह के खेत में खरबूजे की नई किस्म “पंजाब अमृत” को प्रोत्साहित करने के लिए खेत दिवस आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों से 60 से अधिक खरबूजा और सब्जी उत्पादक किसानों ने भाग लिया।
डॉ. मनदीप सिंह, इंचार्ज कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के मार्गदर्शन में आयोजित इस खेत दिवस का मुख्य उद्देश्य फसली विविधता में सब्जियों के योगदान के साथ-साथ किसानों को सब्जियों की नई किस्मों और आधुनिक उत्पादन तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से आए वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों के साथ विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे डॉ. सतपाल शर्मा, प्रमुख, सब्जी विज्ञान विभाग, पीएयू लुधियाना ने किसानों को फसली विविधता में सब्जियों के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने खरबूजे की नई किस्म “पंजाब अमृत” के बारे में बताते हुए कहा कि यह किस्म बॉबी हाइब्रिड के मुकाबले की है। इसकी खास बात यह है कि किसान इसका बीज स्वयं तैयार कर सकते हैं और इसका बीज बॉबी हाइब्रिड की तुलना में सस्ता पड़ता है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि पंजाब अमृत किस्म की बेलें मध्यम लंबाई की, मजबूत और गहरे हरे पत्तों वाली होती हैं। इसके फल अंडाकार-गोल, हरे-पीले और जालीदार छिलके वाले होते हैं तथा इन पर धारियां नहीं होतीं। यह किस्म स्वाद, गुणवत्ता और मिठास से भरपूर है तथा लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है। इसकी औसत पैदावार लगभग 72 क्विंटल प्रति एकड़ है। यह किस्म नवंबर महीने में लो-टनल तकनीक के तहत प्लास्टिक मल्चिंग में बुवाई के लिए भी उपयुक्त है।
डॉ. दिलप्रीत तलवाड़, प्रसार विशेषज्ञ, सब्जी विज्ञान विभाग ने किसानों को खरबूजे की उत्पादन तकनीकों और खादों के संतुलित उपयोग के बारे में जानकारी दी।
डॉ. हरपाल सिंह भुल्लर, कीट वैज्ञानिक ने सब्जियों में कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि कीटनाशकों का उपयोग आवश्यकता अनुसार ही करना चाहिए।
डॉ. अमरजीत सिंह, प्रमुख प्रसार वैज्ञानिक, पौधा रोग विभाग ने किसानों को सब्जियों में होने वाली बीमारियों के लक्षण और उनकी रोकथाम संबंधी जानकारी दी।
डॉ. सैयद पटेल, सब्जी वैज्ञानिक ने मिर्च और टमाटर की नई एवं संकर किस्मों के बारे में उपयोगी जानकारी साझा की।
डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (कृषि मशीनरी) ने सब्जियों की खेती में मशीनों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
डॉ. वितास्ता, सहायक प्रोफेसर (गृह विज्ञान) ने किसानों को सब्जियों की तुड़ाई के बाद उनकी देखभाल और प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी दी।
डॉ. रविंदर कौर, सहयोगी प्रोफेसर (बागवानी) ने किसानों को घरेलू किचन गार्डन लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि घर की जरूरत के लिए रसायन मुक्त सब्जियां स्वयं उगाकर बाजार पर निर्भरता कम करनी चाहिए।
डॉ. कुलविंदर सिंह, बागवानी अधिकारी, संगरूर ने किसानों को सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी योजनाओं की जानकारी दी।
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनके संतोषजनक और वैज्ञानिक उत्तर दिए गए।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को खरबूजे की नई किस्म “पंजाब अमृत” के खेत का दौरा करवाया गया, जहां उन्होंने इसकी विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की। किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय
 द्वारा प्रकाशित सब्जियों संबंधी पुस्तकें भी वितरित की गईं ताकि वे आधुनिक खेती तकनीकों का अधिकतम लाभ उठा सकें।
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