चंडीगढ़, 15 मई 2026 : पंजाब विजिलेंस रिश्वत कांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर में बड़ा खुलासा हुआ है। एफआईआर के अनुसार गिरफ्तार किए गए पिता-पुत्र राघव गोयल और विकास गोयल खुद को पंजाब विजिलेंस के डायरेक्टर जनरल शरद सत्य चौहान और उनके रीडर ओपी राणा का करीबी बताकर सौदेबाजी कर रहे थे।
सीबीआई के अनुसार आरोपियों ने विजिलेंस में लंबित शिकायत को बंद कराने के बदले स्टेट टैक्स अधिकारी अमित कुमार से 13 लाख रुपये और एक महंगा मोबाइल फोन मांगा था।
सीबीआई ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें ओपी राणा, राघव गोयल, विकास उर्फ विक्की गोयल और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। जांच में सामने आया कि रीडर ने कथित तौर पर बिचौलियों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) की फर्जी शिकायत तैयार करवाई।
यह शिकायत 8 मई को अबोहर निवासी अमित कुमार ने दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया कि राघव गोयल और उनके पिता विकास गोयल, जो ठेकेदार हैं, विजिलेंस विभाग में बिचौलियों के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि विजिलेंस मुख्यालय में अमित कुमार के खिलाफ शिकायत लंबित है और उसे निपटाने के लिए रिश्वत मांगी गई।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि आरोपियों ने 13 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसके अलावा ओपी राणा के लिए एक मोबाइल फोन की मांग भी की गई थी।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि रिश्वत की मांग ओपी राणा और डीजी विजिलेंस के नाम पर की जा रही थी। 11 मई 2026 की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 61(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7ए के तहत अपराध मानते हुए औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली।






