रेवाड़ी, 01 मई 2026: जिले के धारूहेड़ा क्षेत्र में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 1.89 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान राजस्थान के करौली निवासी रौनक जाटव और पंकज सैनी, मध्य प्रदेश के भिंड निवासी मानवेंद्र कौरव तथा दतिया निवासी मनविंद्र के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है और मामले में अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।
जांच में सामने आया कि आरोपी रौनक जाटव के खाते में ठगी की रकम में से 5.5 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे, जबकि पंकज सैनी ने बैंक खाता उपलब्ध कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। वहीं मानवेंद्र और मनविंद्र ने भी कमीशन के आधार पर साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराए।
मामला धारूहेड़ा के सेक्टर-6 निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी राजपाल सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने 22 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि फरवरी के अंत में उन्हें अज्ञात कॉल्स आईं, जिनमें कॉलर ने खुद को ट्राई अधिकारी बताकर उनकी सिम बंद होने और उनके नाम से गलत गतिविधियों का आरोप लगाया। बाद में एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई इंस्पेक्टर बताकर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में होने की बात कही और गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया।
आरोपियों ने पीड़ित और उनकी पत्नी को डराकर 3 मार्च से 20 अप्रैल के बीच कुल 1 करोड़ 89 लाख 28 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से संपर्क न करने की धमकी दी गई। यहां तक कि एक ऐप डाउनलोड कराकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई, जिससे वे मानसिक रूप से बंधक बने रहे।
साइबर थाना पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी पुलिस, कोर्ट और जज के वीडियो दिखाकर पीड़ित को गुमराह किया। यहां तक कि संपत्ति बेचने और 70 प्रतिशत राशि सरकारी खाते में जमा कराने के लिए भी दबाव बनाया गया। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।






