Sunday, June 7, 2026
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देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है: सुमन खिचड़

विपक्षियों के षडयंत्र ने महिला सम्मान पर किया आघात: चेयरपर्सन

फ़तेहाबाद, 18 अप्रैल, 2026 (संजीव शर्मा) : संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई हालिया मतदान प्रक्रिया में बिल के पास न हो पाने को लेकर जिला परिषद की चेयरपर्सन एडवोकेट सुमन खिचड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल था, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करना था। एडवोकेट सुमन खिचड़ ने कहा कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा जैसे विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बिल का विरोध किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका। उन्होंने इसे सुनियोजित राजनीति बताते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के सशक्तिकरण की बात तो करता है, लेकिन जब ठोस कदम उठाने का समय आता है तो पीछे हट जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दों को केवल चुनावी वादों तक सीमित रखा है और जमीनी स्तर पर कभी गंभीर प्रयास नहीं किए। सुमन खिचड़ ने कहा कि संसद में इस बिल को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाना इस बात का प्रमाण है कि विपक्ष की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं है। सुमन खिचड़ ने कहा कि इस बिल को रोककर विपक्ष ने देश की आधी आबादी के सपनों को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण से वंचित रखना उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं, न कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार महिलाओं के उत्थान के लिए काम कर रही है, लेकिन विपक्ष इस सकारात्मक बदलाव में बाधा उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को बराबरी का हक देने की दिशा में एक मजबूत कदम था। सुमन खिचड़ ने कहा कि देश की महिलाएं अब सब समझ रही हैं कि उनके अधिकारों के रास्ते में कौन रुकावट बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं इस अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देंगी। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यह विधेयक फिर से संसद में लाया जाएगा और इस बार इसे समर्थन मिलकर यह कानून बन सकेगा।

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