अब राज्यसभा में संभालेंगे नई जिम्मेदारी
पटना, 30 मार्च 2026 : बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण दर्ज किया गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया। लगभग दो दशकों तक बिहार के उच्च सदन का अहम हिस्सा रहने के बाद, नीतीश कुमार की यह विदाई राज्य की संसदीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। उनका इस्तीफा परिषद के सभापति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, जिसके साथ ही सदन में उनके 20 साल लंबे सफर पर विराम लग गया है।
नीतीश कुमार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण उनकी नई राष्ट्रीय भूमिका है। हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों में वे बिहार से निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ राज्य विधानमंडल और संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं रह सकता। चूंकि नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यकाल आगामी 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होने जा रहा है, इसलिए उन्होंने तय समय सीमा से पहले राज्य की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया।
संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, नीतीश कुमार पहली बार 20 मार्च 2006 को विधान परिषद के सदस्य बने थे। इसके बाद वे लगातार चार बार इस सदन के लिए चुने गए और इसी सदन के सदस्य रहते हुए उन्होंने रिकॉर्ड समय तक बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाला। उनके इस लंबे कार्यकाल के दौरान बिहार ने विकास के कई नए पैमानों को छुआ, जिसमें महिला सशक्तिकरण के लिए साइकिल योजना, पंचायती राज में आरक्षण और पूर्ण शराबबंदी जैसे कड़े फैसले शामिल रहे।
अब जबकि वे दिल्ली की राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं, राज्य की सियासत में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना न केवल केंद्र में उनकी भूमिका को मजबूत करेगा, बल्कि बिहार में जदयू के भीतर भी नए नेतृत्व के लिए रास्ता साफ करेगा। 10 अप्रैल से शुरू होने वाली उनकी यह नई पारी देश की राष्ट्रीय राजनीति में बिहार के प्रतिनिधित्व को एक नया आयाम दे सकती है।