चंडीगढ़, 21 मार्च, 2026: पंजाब सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की स्थायी नियुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जल्द ही डीजीपी पद के योग्य उम्मीदवारों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजेगी। पिछले लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इस फैसले की पुष्टि की है।
मुख्यमंत्री की अहम शर्त
हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है। उन्होंने मांग की है कि यूपीएससी के उस पैनल (इम्पैनलमेंट कमेटी) में पंजाब के गृह सचिव को अनिवार्य रूप से सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। भगवंत मान का तर्क है कि इससे अधिकारियों के चयन के दौरान राज्य के पक्ष की बेहतर नुमाइंदगी सुनिश्चित की जा सकेगी।
जुलाई 2022 से चल रही है अस्थायी व्यवस्था
गौरतलब है कि मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से अब तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को कोई औपचारिक सूची नहीं भेजी गई थी। वर्तमान में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव जुलाई 2022 से कार्यवाहक (Acting) डीजीपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डीजीपी राज्य पुलिस बल का मुखिया होता है और कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन
यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रसिद्ध ‘प्रकाश सिंह केस‘ के निर्देशों के तहत संचालित होती है। इसके अनुसार:
- राज्यों को पद खाली होने से तीन महीने पहले पात्र आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है।
- यूपीएससी उनमें से तीन नामों का पैनल राज्य को भेजता है, जिनमें से एक को डीजीपी नियुक्त किया जाता है।
बदला हुआ रुख
इससे पहले पंजाब सरकार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही थी। साल 2023 में सरकार ने ‘पंजाब पुलिस (संशोधन) विधेयक’ पारित कर अपनी स्वयं की कमेटी के माध्यम से नियुक्ति का अधिकार चाहा था। लेकिन फरवरी और मार्च 2026 में यूपीएससी द्वारा भेजे गए ताजा रिमाइंडर्स और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब सरकार ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का मन बना लिया है।






