पंजाबी, हिंदी, उर्दू और पुआधी भाषा की काव्य विधाओं को मिला भरपूर समर्थन
पटियाला, 13 फरवरी 2026 : पटियाला हेरिटेज फेस्टिवल के तहत जिला प्रशासन द्वारा डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया के नेतृत्व में यहां सरकारी महिंद्रा कॉलेज पटियाला में विरासती कवि दरबार का आयोजन किया गया। इस कवि दरबार की नोडल अधिकारी एस.डी.एम. हरजोत कौर मावी ने बताया कि पंजाबी, हिंदी, उर्दू और पुआधी भाषा के कवियों ने ग़ज़लों, कविताओं और साहित्यिक गीतों के माध्यम से बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मुशायरे के दौरान नगर निगम के मेयर कुंदन गोगिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भाषा विभाग पंजाब के निदेशक जसवंत सिंह ज़फ़र ने की। मेज़बान कॉलेज की प्रिंसिपल निश्ठा त्रिपाठी ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया।
मेयर कुंदन गोगिया ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य को रंगला बनाने के लिए जहां विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है, वहीं राज्य की संस्कृति और विरासत को संजोने के लिए विशेष मेलों का आयोजन भी किया जा रहा है। इसी कड़ी के तहत पटियाला हेरिटेज फेस्टिवल मनाया जा रहा है।
अध्यक्षीय संबोधन के दौरान निदेशक जसवंत सिंह ज़फ़र ने कवि दरबार को पटियाला हेरिटेज फेस्टिवल का हिस्सा बनाए जाने की सराहना की। उन्होंने मेज़बान कॉलेज के स्टाफ और विद्यार्थियों द्वारा कविताओं में दिखाई गई रुचि की भी प्रशंसा की। ज़फ़र ने अपनी तीन नज़्में ‘रोना नहीं..’, ‘ख़ून, पसीना ते स्याही’ और ‘दूसरा पासा’ प्रस्तुत कर कवि दरबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वरिष्ठ कवि सुरजीत जज्ज ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की एकता-अखंडता, मेहनतकश वर्ग की स्थिति और वर्तमान राजनीति पर व्यंग्य करते हुए हिंदी और पंजाबी में नज़्में सुनाईं। वहीं कवि बलविंदर संधू ने ‘शहर मेरा पटियाला..’ के माध्यम से शाही शहर की विशेषताओं का उल्लेख किया। त्रिलोचन लोची ने अपनी ग़ज़ल ‘तीन मां’ और ‘घरों की रोशनी’ के जरिए काव्य रस बिखेरा।
डॉ. गुरसेवक लंबी ने ‘दिल को तू दिल रखी’ के माध्यम से मानवीय मूल्यों को उजागर किया, जबकि डॉ. रूबीना शबनम ने अपनी नज़्म ‘आवागमन’ के जरिए महिला जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया।
संत सिंह सोहल ने गुरु गोबिंद सिंह जी पर आधारित नज़्म प्रस्तुत की। चरण पुआधी और सतीश विद्रोही ने पुआधी भाषा में ‘मारे गांव की बुड़ियां..’ और ‘मार्ही बोली, मार्हा लहजा’ के माध्यम से ग्रामीण जीवन का चित्रण किया। नवदीप मुंडी ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि डॉ. आशा किरण ने अपनी रचना के माध्यम से पंजाब के देसी महीनों के रंगों को उजागर किया।
गुरप्रीत ढिल्लों ‘इक अख सु्पना’ और कृपाल मूनक ने ‘माही वे मोड़ बहारा’ को तरन्नुम में प्रस्तुत कर माहौल को भावुक बना दिया। बजिंदर ठाकुर ने ‘अपणी बोली, अपना विरसा’ के माध्यम से पंजाबी मातृभाषा और विरासत को संजोने का संदेश दिया। जसविंदर चाहल ने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘मर्दशुमारी’ के जरिए श्रोताओं को प्रभावित किया, जबकि अमृतपाल शैदा ने दस्तार और अस्मिता पर आधारित नज़्म प्रस्तुत की।
डॉ. गुरविंदर अमन ने मेहनतकश वर्ग की स्थिति, प्रो. पुनीत ने पटियाला, प्रो. सुखविंदर ने महिंद्रा कॉलेज के सफर तथा प्रो. गगनदीप ने पिता-पुत्र संबंधों का भावपूर्ण चित्रण किया। भाषा विभाग के शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने मंच संचालन बखूबी निभाया। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन द्वारा सभी कवियों और अतिथियों को सम्मानित किया गया।






