चंडीगढ़, 12 फरवरी 2026: पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा जारी नोटिस और संबंधित कार्यवाहियों को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग ने बिना किसी स्पष्ट जाति-आधारित आरोप और आवश्यक प्रारंभिक तथ्यों के स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की, जो कानून और संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिका के अनुसार, आयोग द्वारा 9 फरवरी 2026 को जारी नोटिस में न तो किसी ठोस शिकायत का उल्लेख किया गया और न ही निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। इसके बावजूद आयोग ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी, जिसे याचिकाकर्ता ने अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोग के एक अधिकारी ने इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक टिप्पणी की, जिससे कार्यवाही पक्षपातपूर्ण हो गई। इसे न्यायिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया गया है।
याचिका के मुताबिक, आयोग ने फरवरी 2026 में एक सार्वजनिक बैठक में दिए गए भाषण का स्वतः संज्ञान लिया, जबकि उस भाषण में किसी विशेष जाति के विरुद्ध कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि राजनीतिक संदर्भ में कही गई बातों की गलत व्याख्या कर कार्रवाई की गई है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में 9 फरवरी 2026 के नोटिस को रद्द करने तथा आयोग को आगे की कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है। साथ ही अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि आयोग को भविष्य में किसी भी मामले में कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए जाएं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि आयोग की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है और इससे याचिकाकर्ता की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि जारी नोटिस से उन्हें गंभीर और अपूरणीय क्षति हो सकती है।
मामले की सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की गई है।






