रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से पंजाब को हर साल ₹4,800 करोड़ का नुकसान – मोहित मोहिंद्रा
पटियाला, 5 फरवरी, 2026 : पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष मोहित मोहिंद्रा ने आज यूनियन बजट 2026 में पंजाब को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह उस राज्य के प्रति केंद्र सरकार की शर्मनाक बेरुखी है, जो देश को अनाज खिलाता है और सीमाओं की रक्षा करता है।
मोहिंद्रा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत का ‘फूड बाउल’ कहलाने वाला पंजाब न तो बजट में कहीं उल्लेखनीय है, न कोई राहत दी गई है और न ही भविष्य के लिए कोई ठोस योजना पेश की गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन मोदी सरकार की बजट प्राथमिकताओं में पंजाब मानो मौजूद ही नहीं है।
उन्होंने याद दिलाया कि वर्षों से पंजाबियों ने देश के करोड़ों लोगों को भोजन दिया है, सीमाओं पर अतुलनीय बलिदान दिए हैं और हमेशा देश की पहली रक्षा पंक्ति बने रहे हैं। लेकिन आज जब किसान, युवा और गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा पंजाब केंद्र सरकार की सहायता का इंतजार कर रहा है, तो हमें मिलता है सिर्फ एक बड़ा शून्य। न कोई विशेष घोषणा, न लक्षित राहत और न ही भविष्य की कोई स्पष्ट दिशा।
पिछले वर्ष पंजाब में आई भीषण बाढ़ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया फिर से नाकाफी रही। हमारी फसलें, घर और बुनियादी ढांचा तबाह हो गया, लेकिन पंजाब को कोई ठोस राहत नहीं मिली। क्या पंजाबी भारत के नागरिक नहीं हैं? उन्होंने सवाल किया और कहा कि केवल दिखावे और प्रतीकात्मकता से शासन नहीं चलता।
उन्होंने इसे पंजाब के लिए ‘डबल झटका’ बताते हुए 16वें वित्त आयोग द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद करने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस एक फैसले से पंजाब को हर साल लगभग ₹4,800 करोड़ का नुकसान होगा, जो एक बहुत बड़ा वित्तीय आघात है।
मोहिंद्रा ने कहा कि यह राशि रोजगार से जुड़े स्किल प्रोग्रामों, स्टार्ट-अप्स, खेल ढांचे, कॉलेजों, रिसर्च संस्थानों और युवाओं के पलायन को रोकने में उपयोग की जा सकती थी। “रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण जैसी रोजमर्रा की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है। इसकी बंदी से पंजाब पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ जाएगा।”
केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए मोहिंद्रा ने आम आदमी पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी वित्त आयोग के समक्ष पंजाब का मजबूत पक्ष न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग के फैसले मजबूत आंकड़ों, ठोस वित्तीय दलीलों और निरंतर संवाद से प्रभावित होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आप सरकार ने संवाद की बजाय शोर मचाना चुना और पंजाब के हितों की रक्षा करने में विफल रही।
उन्होंने कहा कि शासन का अर्थ नुकसान होने के बाद केंद्र को दोष देना नहीं, बल्कि नुकसान होने से पहले उसे रोकना होता है।
अंत में मोहिंद्रा ने कहा कि जो सरकार पंजाब के वित्तीय हितों की रक्षा नहीं कर सकती, वह पंजाब के युवाओं की भी रक्षा नहीं कर सकती। पंजाब को न्याय, सम्मान और उसका हक चाहिए — न कि अनदेखी और राजनीतिक नाटक।
फोटो : प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोहित मोहिंद्रा
जारीकर्ता
गोल्डी
पीआरओ (मोहित महिंद्रा, कांग्रेस)
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