Friday, June 5, 2026
HomePatialaपटियाला में हुआ 'साहित्य्य कलश पुरस्कार समारोह' — कवि सम्मेलन, पुस्तक विमोचन...

पटियाला में हुआ ‘साहित्य्य कलश पुरस्कार समारोह’ — कवि सम्मेलन, पुस्तक विमोचन और समाजसेवा का अनोखा संगम

पटियाला, 6 नवंबर (जगप्रीत महाजन): साहित्य्य कलश प्रकाशन और परिवार पटियाला की ओर से प्रभात परवाना हॉल में वार्षिक पुरस्कार समारोह, पुस्तक विमोचन और राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

इस आयोजन में न केवल पंजाब बल्कि विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों और कवियों ने भाग लिया। लगभग 300 साहित्य प्रेमी इस गरिमामय कार्यक्रम का हिस्सा बने।-

कविता, ग़ज़ल और कहानियों से सजा हॉल

समारोह की शुरुआत साहित्य्य कलश के संस्थापक सागर सूद संजे द्वारा मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।

पहले सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी कविताओं, ग़ज़लों, व्यंग्य और लघुकथाओं के माध्यम से सभागार को साहित्यिक रंगों से भर दिया।

160 ज़रूरतमंद छात्रों को दी गई कापियाँ

दूसरे सत्र में, साहित्य्य कलश की ओर से 160 जरूरतमंद विद्यार्थियों को नोटबुक्स वितरित की गईं, जिससे सामाजिक सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया गया।

11 पुस्तकों का विमोचन:

पुस्तक विमोचन सत्र में कुल 11 पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें सागर सूद द्वारा संपादित “शब्दों की महफ़िल” और “काव्य त्रिंझण” के साथ-साथ डॉ. इंदर पाल सिंह, पुनीत गोयल, अमृत पाल कौर, डॉ. अनीशा अंगरा अंगिरा और अमित वर्मा रहबर की पुस्तकों का विमोचन हुआ।

‘राजेंद्र व्यथित साहित्य गौरव सम्मान 2025’ से हुए सम्मानित:

पुरस्कार समारोह के दौरान सागर सूद ने स्वर्गीय राजेंद्र व्यथित की स्मृति में स्थापित “राजेंद्र व्यथित साहित्य गौरव सम्मान 2025” प्रदान किया।

इस सम्मान से सुनील भास्कर, डॉ. अनीश गर्ग, निरंजन बोहा, बजिंदर ठाकुर, अमृत पाल सिंह कॉफी और कुलविंदर कुमार जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

अन्य साहित्यकारों को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष सम्मान दिए गए।

विशिष्ट अतिथियों ने की सराहना

समारोह में पवन गोयल, डॉ. नीरज भारद्वाज, त्रिलोक सिंह ढिल्लों और गीता रानी जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

उन्होंने सागर सूद और उनके परिवार की साहित्यिक व सामाजिक योगदान के प्रति समर्पण भावना की खुलकर प्रशंसा की।

साहित्य कलश परिवार के सदस्यों का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया, साथ ही उन सदस्यों को याद किया गया जो अब इस दुनिया में नहीं रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और सांझे भोजन (लंच) के साथ हुआ।

यह आयोजन पटियाला की साहित्यिक धरती पर कविता, सेवा और संस्कृति के सुंदर संगम के रूप में दर्ज हो गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments