नई दिल्ली/लंदन: हिंदुजा समूह और वैश्विक व्यापार जगत के लिए बुधवार का दिन दुखद रहा। समूह के चेयरमैन और भारतीय मूल के अरबपति उद्योगपति गोपीचंद परमानंद हिंदुजा का लंदन के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है। व्यापारिक जगत में ‘जीपी’ (GP) के नाम से प्रसिद्ध गोपीचंद हिंदुजा पिछले कुछ सप्ताह से बीमार चल रहे थे।
गोपीचंद हिंदुजा चार हिंदुजा भाइयों में दूसरे स्थान पर थे। उन्होंने मई 2023 में अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद समूह के चेयरमैन का पद संभाला था। उनके परिवार में पत्नी सुनीता, दो बेटे — संजय और धीरज, और एक बेटी रीता शामिल हैं।
ब्रिटेन के सबसे अमीर शख्स थे ‘जीपी’
गोपीचंद हिंदुजा की गिनती ब्रिटेन के सबसे धनी व्यक्तियों में होती थी।
संडे टाइम्स रिच लिस्ट (Sunday Times Rich List) के 18 मई 2025 संस्करण में गोपीचंद हिंदुजा और उनके परिवार ने शीर्ष स्थान हासिल किया था।
उस समय उनकी कुल संपत्ति 33,67,948 करोड़ रुपये (लगभग 37 बिलियन पाउंड) आंकी गई थी।
1959 में जुड़े पारिवारिक कारोबार से, बनाए वैश्विक साम्राज्य
मुंबई के जय हिंद कॉलेज से स्नातक गोपीचंद हिंदुजा 1959 में अपने पारिवारिक व्यापार से जुड़े। उनके नेतृत्व में हिंदुजा समूह ने पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर बैंकिंग, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में कदम रखा और एक वैश्विक औद्योगिक महाशक्ति (Global Industrial Powerhouse) के रूप में स्थापित हुआ।
दो ऐतिहासिक अधिग्रहणों से बदला हिंदुजा समूह का चेहरा
- गल्फ ऑयल (Gulf Oil) – 1984: समूह ने 1984 में गल्फ ऑयल का अधिग्रहण किया।2. अशोक लीलैंड (Ashok Leyland) – 1987: तीन वर्ष बाद 1987 में, समूह ने भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी अशोक लीलैंड को खरीदा — यह भारत में किसी प्रवासी भारतीय (NRI) द्वारा किया गया पहला बड़ा निवेश माना गया। इस अधिग्रहण ने डूबती हुई अशोक लीलैंड को नई दिशा और सफलता दी।
गोपीचंद हिंदुजा अपने विनम्र स्वभाव, दूरदर्शी नेतृत्व और भारतीय मूल्यों में विश्वास के लिए जाने जाते थे। उनके निधन से वैश्विक व्यापार जगत ने एक दूरदर्शी उद्योगपति और समाजसेवी को खो दिया है।






